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एनएफएल एेश पौंड और नंगल डैम के नीचले एरिया में देखे 9159 पक्षी
नेशनलवेटलैंड नंगल में प्रवासी पक्षियों की गिनती का कार्य वाइल्ड लाइफ विभाग द्वारा जागृति संस्था चंडीगढ़ की एवियन हेवीटैट सोसायटी,चंडीगढ़ बर्ड क्लब डब्ल्यूडब्ल्यूएफ, स्थानीय बर्ड वाॅचरों के सहयोग से किया गया। इस संबध में जानकारी देते हुए वाइल्ड लाइफ विभाग रोपड़ के डीएफओ देव राज शर्मा डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की गीतांजलि कंवर ने बताया कि इस सर्वे में विभिन्न प्रजातियों के नंगल झील के अलावा एनएफएल ऐश पौंड, नंगल डैम के नीचले एरिया सतलुज नदी में 9159 पक्षी देखे गए इसमें नंगल झील में विभिन्न प्रजातियों के 5585, एनएफएल ऐश पौंड में 1839 डाउन स्टीम नंगल डैम में 635 के करीब पक्षी देखे गए। इस बार नंगल में बहुत कम दिखने वाले पक्षी कॉमन शैल्डेक भी देखी गई जो कि भारत में सिर्फ पौंग डैम में आती है और कभी कभार देखी जाती है। इस बतख की चोंच गुलाबी रंग की है और यह साइबेरिया से आती है। इसे देखना पक्षी प्रेमियों के लिए काफी खुशी की बात रही। इनमें से सबसे ज्यादा कूट 1005, रेडक्रैस्टेड पोचहड 567, गैडवाल 587, मैलाड 117, रूडी शैल्डैक 400, बार हैडेड गीज 700, नॉर्दर्न शौवेलर 1046, ग्रेलैग गूज़ 166 के अलावा अन्य प्रजातियों पिनटेल डक, कॉमन पोर्चड आदि प्रजातियों के पक्षी देखे गए। 147, कॉमन पोर्चड 190 सहित अन्य कई प्रजातियों के पक्षी देखे गए इस सर्वे में एवियन हेवीटैट सोसायटी के नवजीत सिंह,रीमा ढिल्लों, मैडम सरबजीत, अमनदीप के अलावा एसपीडी हरमीत सिंह हुंदल, जागृति संस्था के डाॅ संजीव गौत्तम, प्रभात कुमार, डाॅ. सतवीर सिंह, डाॅ. पंजाब वाइल्ड लाइफ एडवाइजरी बोर्ड के सदस्य पर्यावरण विज्ञानी डाॅ. जीएस चट्ठा, डाॅ. जीएस चट्ठा , डीएफओ देवराज शर्मा, इन्स्पेक्टर सुनील कुमार, पंजाबी यूनिवर्सिटी की रिसर्च स्कॉलर राजविंदर कौर, मायना, बलविन्दर सिंह, ब्लॉक अफसर अमरजीत, अमृतलाल विक्रम आदि उपस्थित थे इस अवसर पर रीमा ढिल्लों ने बताया कि यहां विभिन्न देशों से हर वर्ष प्रवासी पक्षी भारत, श्रीलंका, वर्मा आदि देशों से आते हंै। यह प्रवासी पक्षी हर वर्ष साइबेरिया, रशिया, चाइना, अफगानिस्तान, मंगोलिया तिब्बत केे पहाड़ों पर सर्दी बढ़ते ही भारत की झीलों की ओर रुख कर लेते हंै। इनमें बार हैडेड गीज, राजहंस, रूडी शैलडेक सुरखाव ग्रे लैग गीज़, कूटज़, नॉर्दर्न शिवलिर, पिनटेल डक, मैलार्ड, रेड क्रैस्टिड पोचहर्ड, कॅामन पोचहर्ड, सी गर्ल्ज, विज़न, टफटिड डक, मार्श हैरियर, गैड वाल, ग्रेट कारमोरेंट, क्रैस्टिड ग्रेव, लिटिल ग्रेव, पेंटिड स्टार्क आदि आते हैं और यह 6 महीने तक भारत श्रीलंका की झीलों में रहते हैं और जैसे ही इस एरिया में गर्मी बढ़नी शुरू होती है। यह वापस अपने एरिया में चले जाते हंै। रीमा ने कहा कि उनकी एनजीओ द्वारा हरीके अंतरराष्ट्रीय वेटलैंड, केशोपुर, गुरदासपुर वेटलैंड में भी सरकारी विभाग के साथ बर्ड सर्वे किए गए हैं, जहां पर इस बार पहले से ज्यादा पक्षी देखे गए।
एनएफएल ऐश पौंड में सर्वे के दौरान पक्षियों के चित्र खींचते वर्ड वाचर प्रतिभागी। साथ ही झील में अठखेलियां करते पक्षी। और विभिन्न संस्थाआंे के प्रतिनििध।