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क्या डायबिटीज की दवा से बुढ़ापा रोकना संभव है?

5 वर्ष पहले
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कुछ भीकर लिया जाए पर बुढ़ापे को रोका नहीं जा सकता है। फिर भी, विशेषज्ञों की सोच है कि कुछ दवाइयों और कंपाउंड से बुढ़ापे की गति धीमी करना संभव है। एक नए ट्रायल ने मेटफोर्मिन दवा के संबंध में उम्मीदें जगाई हैं। अलबर्ट आइंस्टीन मेडिसिन कॉलेज में वृद्धावस्था रिसर्च के डायरेक्टर डॉ. निर बरजिलाई कहते हैं, ऐसी कई छोटी बातें हैं जो बताती हैं कि मेटफोर्मिन जादू जगाने की कगार पर है।

डॉ.बरजिलाई मेटफोर्मिन से बुढ़ापा रोकने की स्टडी के प्रमुख हैें। यह दवा टाइप-2 डायबिटीज रोकने में कारगर साबित हुई है। नई रिसर्च ने संकेत दिए हैं कि मेटफोर्मिन डायबिटीज के अलावा कई अन्य बीमारियों से लड़ सकती है। इस दवा का संबंध दिल की बीमारियों, कई प्रकार के कैंसर और आंखों की बीमारी ग्लूकोमा के खतरे को कम करने में पाया गया है। 2014 की स्टडी में पाया गया कि टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित मेटफोर्मिन लेने वाले लोग उन स्वस्थ लोगों की तुलना में अधिक जीवित रहे जिन्हें डायबिटीज नहीं है और जो दवा नहीं लेते हैं।

मेटफोर्मिन ब्लड शुगर को नियंत्रित करती है। इसके साथ वह बुढ़ापे की प्रक्रिया धीमी करती है। अमेरिका में दवा के ट्रायल का विस्तार किया जा रहा है। यह अमेरिका में 14 केन्द्रों पर होगा। इस पर 449 करोड़ रुपए खर्च होंगे। कैंसर, दिल की बीमारी या डिमेंेशिया से पीड़ित या उसके खतरे का सामना कर रहे 65 से 80 वर्ष की आयु के 3000 लोग इसमें शामिल होंगे। आधे लोग मेटफोर्मिन लेंगे। उन पर लगभग छह वर्ष तक नजर रखी जाएगी। देखा जाएगा कि क्या मेटफोर्मिन लेने से बीमारियों से बचाव संभव है। और मौत को आगे बढ़ाया जा सकता है। डॉ. बरजिलाई का कहना है, जब कई बीमारियां एक साथ होती हैं तब किसी विशेष बीमारी की बजाय बुढ़ापे की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। इसलिए दीर्घ जीवन से जुड़ी गुत्थियों को सुलझाने के लिए मेटफोर्मिन ट्रायल निर्णायक मोड़ हो सकता है।

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