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बारिश ने रोकी राहत की रफ्तार अब तक 2 लाख लोग बचाए

7 वर्ष पहले
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बाढ़की वजह से राज्य में करीब 2,500 सड़कों 163 पुलों को नुकसान पहुंचा है। इधर, जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे भूस्खलन के कारण बीते 10 दिनों से बंद पड़ा है। वहीं, कश्मीर में जहां सब्जियों के दाम बढ़ा दिए हैं वहीं मांस के दाम गिर गए हैं। ऐसा बाढ़ के चलते शादियों के कार्यक्रम रद्द होने की वजह से हुआ है।

गुरुद्वारे, मंदिर, मस्जिद बने राहत शिविर

कुदरतकी मार ने कश्मीर के लोगों में अमीर-गरीब और धर्म का अंतर मिटा दिया है। सभी धर्म और सभी स्तर के लोग इस समय गुरुद्वारों, मंदिरों, मस्जिदों में बने शिविरों में एक-दूसरे का साथ दे रहे हैं। शंकराचार्य मंदिर में बने राहत शिविर में हजारों ऐसे लोग हैं जो अपने घर, कारोबार खो चुके है। इनमें हिंदुओं के अलावा मुस्लिम और सिख भी हैं। राजबाग के शबीर अहमद 8 सितंबर से मंदिर में ही रह रहे हैं। शहीद बुंगा गुरुद्वारे में करीब 2,000 सिख, मुस्लिम और हिंदू परिवार ठहरे हैं।

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए खाद्य सामग्री भेजी है। रविवार को दरबार साहिब से संगत ने करीब एक लाख पैकेट श्रीनगर भिजवाए गए। उधर, बठिंडा से सैन्य चिकित्सा सेवा भी श्रीनगर मूव की गई है। 10 टन दवाइयां और मोबाइल ऑक्सीजन प्लांट आिद सामग्री दिल्ली से श्रीनगर पहुंच चुकी है। कंबल टैंट, आईआरसीटीसी से पानी बोतल और खाद्य पैकेट सहित और राहत सामग्री हैदराबाद, अहमदाबाद, वडोदरा और अमृतसर से भेजे जा रहे हैं।

श्री दरबार साहिब में बाढ़ पीिड़तों के लिए संगत ने लंगर तैयार किया।

पंजाब से लंगर भेजना जारी

भास्कर नेटवर्क | श्रीनगर/जम्मू

जम्मू-कश्मीरमेंरविवार सुबह हुई बारिश से 3 घंटे तक राहत का काम रुका रहा। घने बादलों अंधेरे की वजह से किसी भी हेलीकॉप्टर ने उड़ान नहीं भरी। दिन में 11 बजे के बाद बारिश थमने पर सभी टीमें फिर से बचाव कार्य में जुट पाईं। सेना ने अब तक करीब दो लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया है।

सुबह करीब साढ़े आठ बजे बारिश शुरू हुई। इससे कश्मीर के लोग एक बार फिर डर गए। ज्यादा परेशानी उन लोगों को हुई जो इन दिनों सड़कों पर ही हैं। दूसरी तरफ, सरकार के पटरी पर लौटाने की कवायद शुरू हो गई है। चीफ सेक्रेटरी एमआई खांडे ने सभी मुलाजिमों से जल्द से जल्द काम पर लौटने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि जो दफ्तर में रिपोर्ट नहीं करेगा