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मोह का त्याग कर मानव जीवन को सफल बनाएं : साध्वी श्रेष्ठा
एसएसजैन स्थानक में चातुर्मास के लिए विराजमान प्रवचन प्रभाविका साध्वी श्री श्रेष्ठा जी महाराज ने धर्म सभा में कहा कि इस दुनिया में चार तरह के इंसान होते हैं। पहला अंदर और बाहर से अमृत की तरह। दूसरा अंदर से अमृत और मुंह से जहर। तीसरा मुंह से अमृत और अंदर से जहर। चौथे प्रकार के लोग अंदर और बाहर से जहर की तरह कड़वे होते हैं। उन्होंने पहले दो प्रकार के लोगों के बारे में बताते हुए कहा कि तीर्थकर भगवान अंदर और बाहर से अमृत के समान होते हैं। दूसरे माता-पिता गुरु (संत) जो बच्चे की भलाई के लिए मुंह से कई बार कड़वा भी बोल देते हैं लेकिन अंदर से उनका ह्रदय अमृत के समान होता है।
साध्वी डा. चन्दना जी महाराज ने कहा कि जीवन में बुराई और अच्छाई दोनों हैं लेकिन ये आप पर निर्भर करता है कि हमने बुराई की ओर जाना है या अच्छाई की ओर। हमें कांटों की बुराई करने वाले तो बहुत मिल जाएंगे लेकिन उन कांटों के बीच में खिले हुए फूलों की महिमा करने वाले बहुत कम लोग मिलेंगे। चोर, जुआरी, शराबी या संत सबकी अपनी-अपनी दृष्टि है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि एक बार एक चोर किसी के घर चोरी करने गया लेकिन उसे सारी रात उस घर में से कुछ नहीं मिला। सुबह वह चोर थककर सड़क ही सो गया। उसे दूसरे चोर ने देखा और कहा कि आज फिर इसको कुछ नहीं मिला होगा और सारी रात जागने के कारण इसको नींद गई। फिर जुआरी की नजर उस पर पड़ी उसने कहा कि जुए में सारा कुछ हार गया होगा तभी यहां पर पड़ा है। शराबी ने कहा कि रात को शराब ज्यादा पी ली होगी तभी शराब के नशे में यहां पड़ा है लेकिन सुबह जब एक संत ने देखा तो कहा कि यह इंसान परमात्मा की भक्ति में इतना लीन है कि इसको कोई सुध बुध नहीं कि मैं कहां पड़ा हूं। इसलिए कहा जाता है कि हर इंसान का देखने का अपना-अपना नजरिया होता है। जो लोग अपना नजरिया बदल लेते हैं उनका इस लोक और परलोक दोनों में कल्याण हो जाता है।
साध्वी प्रियांशी जी महाराज ने कहा कि आज प्रत्येक व्यक्ति टेंशन में जी रहा है। हमें चिंता को चिंतन में बदलकर हमेशा कमल के समान बनकर रहना होगा।
मोह के कारण इंसान बहुत दुखी है। जो लोग मोह का त्याग कर देते हैं वह अपने जीवन का कल्याण करने में सफल हो जाते हैं।