- Hindi News
- गंदे नाले के पक्के किनारे पहली बरसात में बहे
गंदे नाले के पक्के किनारे पहली बरसात में बहे
सुनामीगेट स्थित गंदे नाले को कवर करने के कार्य की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। शनिवार की बरसात के कारण गंदे नाले को कवर करने के लिए पक्के किए गए किनारे पानी के साथ बहने लगे हैं। करोड़ों रुपए के प्रोजेक्ट की ऐसी हालत को देखकर लोगों में रोष पनपने लगा है।
सुनामी गेट से स्थित गुरुद्वारा हरगोबिंद पुरा से लेकर शनिदेव के मंदिर तक गंदे नाले को कवर करने के लिए करीब 1 करोड़ 8 लाख रुपए की लागत से कार्य को शुरू किया गया है। प्रोजेक्ट के दौरान गंदे नाले के किनारों को पक्का करके उसे कवर करने का कार्य चल रहा है। इसका कार्य कुछ माह में पूरा होने की संभावना जताई जा रही थी। शनिवार को बरसात के कारण गंदे नाले के पक्के किए जा रहे किनारे पानी के साथ बहने लगे हैं। हैरत इस बात की है कि किनारों पर महज ईंटें लगाकर पक्का किया जा रहा है। बरसात के दौरान मिट्टी गिरने से ईंटों ने भी किनारों का साथ छोडऩा शुरू कर दिया है।
कई स्थानों पर पक्के किए गए किनारे बह गए हैं। पेंशनर्स नेता राज कुमार अरोड़ा का कहना है कि गंदे नाले को कवर करने का कार्य तसल्लीबख्श नहीं किया जा रहा है। नियमों के अनुसार कार्य को अंजाम नहीं दिया जा रहा है।
कार्य की जांच करवाने की उठाई मांग
पूर्वपार्षद संजय गाबा का कहना है कि करोड़ों रुपए के प्रोजेक्ट पर खानापूर्ति कर नगर काउंसिल को चूना लगाने की कोशिश की जा रही है। अभी गंदे नाले को कवर करने के लिए लैंटर नहीं डाला गया था। ऐसे हालात में लेंटर भी गिर सकता था। पहली बरसात में किनारों का बहना काम की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर रहा है। मांग की गई कि कार्य की जांच करवा कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए।
जांच के बाद होगी कार्रवाई
^मामलाअभी ध्यान में आया है। अभी नगर काउंसिल के प्रशासक राजेश धीमान को मामले की जांच सौंप रहे हैं। जांच के बाद अगली कार्रवाई की जाएगी। अर्षदीपसिंह थिंद, डीसी,संगरूर
संगरूर: गंदे नाले को कवर करने के लिए पक्के किए गए किनारे पहली बरसात में ही बह गए। प्रौजैक्ट की गुणवत्ता को लेकर उठे सवाल।