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राइस उद्योग समिति के 7 सदस्य को ढाई साल कैद

7 वर्ष पहले
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सबडिवीजनल ज्युडीशियल मजिस्ट्रेट सुनाम की अदालत ने लाखों रुपए की धान खुद-बुर्द करने के आरोप में एक राइस उद्योग के सात सदस्यों को ढाई- ढाई साल की सजा सुनाई है। मामले में एक मात्र आरोपी महिला की मौत हो चुकी है। जबकि राइस उद्योग का सचिव भगौड़ा चल रहा है।

पंजाब एग्रो के वकील राहुल शर्मा ने बताया है कि पंजाब एग्रो फूड कारपोरेशन की ओर से 30 नवंबर 2000 को 27531 थैले धान मिलिंग के लिए गिल सन राइस उद्योग समिति शेरों को दिए थे। जिसके बदले एग्रीमेंट के अनुसार 20 अक्टूबर 2001 को 8809.92 क्विंटल चावल पंजाब एग्रो को वापस किए जाने थे परंतु उक्त उद्योग समिति की ओर से 6287.92 क्विंटल चावल ही वापस किए गए। शेष 2521.097 क्विंटल चावल विभाग को वापस नहीं किए गए। जिसकी मौके पर कीमत 25,27,248 रुपए बनती थी। ऐसे में पंजाब एग्रो की ओर से राइस उद्योग परिसर में चेकिंग की गई जहां चावल नहीं थी।

इस संबंधी पंजाब एग्रो की ओर से उक्त राइस उद्योग समित के विरुद्ध एसएसपी संगरूर को कार्रवाई के लिए शिकायत दी गई। मामले की सुनवाई करते हुए ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट सुनाम संजीव कुंडी की अदालत ने समिति के सात सदस्यों को ढाई-ढाई साल की कैद और दो-दो हजार रुपए जुर्माना अदा किए जाने का फैसला सुनाया। जुर्माना अदा नहीं किए जाने पर कैद ढाई माह बढ़ जाएगी।

उन्होंने बताया कि सुनवाई के दौरान समिति की महिला सदस्य लाभ कौर की मौत हो चुकी है जबकि समिति का सचिव गगनजोत सिंह को भगोड़ा करार दिया गया है।

इन पर हुआ था मामला दर्ज

पुलिसने राइस उद्योग के सात सदस्यों गगनजोत सिंह सचिव, लाभ कौर निवासी शेरों, बलवीर सिंह निवासी शेरों, मोहिन्द्र सिंह निवासी शेरों, सुखपाल सिंह निवासी शेरों, भूपिंदर सिंह निवासी शेरों, नछतर सिंह निवासी शेरों के विरुद्ध सुनाम में मामला दर्ज किया गया था।

चेक बाउंस हो गए थे

उन्होंनेबताया कि इस दौरान समिति की ओर से शेष चावलों की राशि 25,27,248 रुपए के चेक पंजाब एग्रो को दे दिए गए परंतु वह चेक बाउंस हो गए। जिसकी पड़ताल एंटी फ्रॉड स्टाफ की ओर से की गई।