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- शहर के विकास के लिए नगर सुधार ट्रस्ट से 8 करोड़ रुपए का लिया था कर्ज
शहर के विकास के लिए नगर सुधार ट्रस्ट से 8 करोड़ रुपए का लिया था कर्ज
नगर काउंसिल ने एक फीसदी ब्याज पर लिया था कर्ज।
संगरूर: नाले को कवर करने का अधूरा पड़ा कार्य।
कर्ज की पहली किश्त भी अदा नहीं कर पाई नगर काउंसिल
भूपिंदर सिंह|संगरूर
करोड़ोंरुपए कर्ज लेकर शहर का विकास करवाने का दम भरने वाली नगर काउंसिल तो पूरे तरीके से शहर का विकास करवा पाई है और ही कर्ज की पहली किश्त अदा कर पाई है।
कर्ज चुकाने को लेकर नगर सुधार ट्रस्ट ने नगर काउंसिल को एक पत्र भी लिखा है। गौरतलब हो कि नगर काउंसिल ने नगर सुधार ट्रस्ट से 8 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था। एक फीसदी ब्याज पर लिया कर्ज पांच सालों में दस छमाही किश्तों में ब्याज समेत वापस करना तय हुआ था। कर्ज की छमाही किश्त समेत ब्याज करीब 1 करोड़ 28 लाख रुपए 1 अगस्त 2014 को नगर सुधार ट्रस्ट को अदा करनी थी जो नगर काउंसिल अदा नहीं कर सकी। लोकसभा चुनाव से पहले शहर में लगभग 13 करोड़ रुपए के विकास कार्य करवाने का प्रस्ताव डाला गया था परंतु विकास कार्यों के लिए जरूरी पैसा नगर काउंसिल के पास नहीं था। विकास कार्यों के लिए नगर सुधार ट्रस्ट से 8 करोड़ रुपए का कर्ज लेने का फैसला किया गया। जिसके लिए बाकायदा नगर काउंसिल के प्रशासक द्वारा ईओ को कर्ज लेने के अधिकार दिए गए। जिसके बाद 8 करोड़ का कर्ज लिया गया करीब 3 करोड़ रुपए का प्रबंध नगर काउंसिल द्वारा अपने साधनों से किया गया।
इस रकम में से नगर काउंसिल ने अपने मुलाजिमों की बकाया पड़ी देनदारियां कर दी कुछ रकम की अदायगी पुराने कार्यों के ठेकेदारों को कर दी गई। कर्ज की रकम समेत लगभग 11 करोड़ रुपए में से देनदारियां करके जो पैसा बचा उससे शहर का थोड़ा बहुत विकास करवा दिया। जबकि बाकी काम अधर में लटक गए। 1 करोड़ 8 लाख रुपए की लागत से गुरुद्वारा साहिब हरगोबिंदपुरा से मुख्य सड़क पर गंदे नाले को कवर किया जाना था परंतु काम पूरी नहीं हो सका। इसके अलावा अन्य कई कार्य अधूरे रह गए।
यह भी चर्चा है कि लोकसभा चुनाव से बिलकुल पहले 8 करोड़ रुपए का कर्ज इस कारण लिया गया था ताकि शहर में विकास करवाकर चुनावों में सियासी लाभ लिया जा सके। सत्ताधारी पार्टी को तो सियासी लाभ मिला ही शहर का विकास हुआ परंतु नगर काउंसिल करोड़ों रुपए के कर्ज के नीचे जरूर दब गई। नगर काउंसिल की आर्थिक दशा का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वह कर्ज की पहली किश्त भी नहीं भर सकी। पहली किश्त भरने पर अब अगली क