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फसलों के बचाव के टिप्स दिए

7 वर्ष पहले
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पंजाबखेतीबाड़ी यूनिवर्सिटी के कृषि विज्ञान केन्द्र खेड़ी की ओर से डिप्टी डायरेक्टर (ट्रेनिंग) की अगुवाई में फसलों में कीटनाशक के इस्तेमाल संबंधी जानकारी देने के लिए गांव बटडियाना में किसान सिखलाई कैंप लगाया गया। इस कैंप में सहायक प्रोफेसर डाॅ. गुरबीर कौर ने बताया कि सरसों और राईया में झुलस रोग के हमले के कारण पौधे के पत्ते, फलियां और तने पर भूरे रंग के धब्बे पड़ जाते हैं। अधिक हमले की सूरत में तने का उपरी हिस्सा फलियां झड़ जाती हैं। इस रोग से बचाव के लिए जब फसल करीब 75 दिन की हो जाए तो पहला छिड़काव 250 ग्राम ब्लाइटोक्स या इंडोफिल एम 45 का 100 लीटर पानी में घोल तैयार कर प्रति एकड़ के हिसाब से करना चाहिए। दूसरा छिड़काव 15 दिनों के बाद और तीसरा छिड़काव अगले 15 दिनों के बाद करना चाहिए। इसके अतिरिक्त सरसों पर चेपा की रोकथाम के लिए जब 40- 50 प्रतिशत पौधे पर चेपा का हमला नजर आए तो ऐकटारा 40 ग्राम 25 डब्ल्यू पी या मैटासिसटाकस 25 ईसी या रोगोर 30 ईसी या एकालकस 25 ईसी 400 मिली लीटर प्रति एकड़ के हिसाब से 80- 125 लीटर पानी में घोल कर छिड़काव करना चाहिए।

डाॅ. मनदीप ने कहा है कि गेहूं के खेतों में मैग्नीज तत्व की कमी नजर आने पर वहां एक किलो मैग्नीज सल्फेट 200 लीटर पानी में घोल तैयार कर 2- 3 छिड़काव सप्ताह बाद धूप में करने चाहिए। कैंप के अंत में किसानों की ओर से बलवंत सिंह जगतार सिंह के खेतों में बिजाई की गई कनोला सरसों की प्रदर्शनी भी देखी गई।

संगरूर में किसान सिखलाई कैंप में जानकारी देते माहिर।