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साइक्लिंग से दिया बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का संदेश

5 वर्ष पहले
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रविवारको संगरूर साइकिल क्लब के सदस्यों ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का संदेश लेकर संगरूर के विभिन्न गांवों में साइक्लिंग की। खास बात यह है कि महिला डॉक्टर सदस्यों ने राइड में शामिल होकर लोगों को बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का संदेश दिया। रविवार को सदस्यों ने 72 किलोमीटर तक साइक्लिंग करके इस संदेश को घर-घर तक पहुंचाया है। ग्रीन सिटी-क्लीन सिटी की सफलता के बाद क्लब सदस्यों को इस मुहिम में भी सफलता मिलने की उम्मीद है।

बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का संदेश लेकर संगरूर साइकिल क्लब से जुड़ी आंखों की माहिर डॉक्टर मानसी जिंदल का कहना है कि संगरूर में लिंग अनुपात के आंकड़ों पर गौर की जाए तो दिसंबर 2015 में 11532 लड़कों और 9720 लड़कियों ने जन्म लिया है। जिससे साफ है कि वर्तमान समय में भी लोग लड़कियों के मुकाबले लड़कों को अधिक महत्व दे रहे हैं। इस सोच को बदलने के लिए बेटी बचाओ-बेटी को पढ़ाओ के संदेश को लेकर साइकिल पर निकली हैं। मौके पर सौरभ शर्मा, वरूण गुप्ता, दीपक कुमार, निशांत शर्मा, पंकज घई आदि उपस्थित थे। मानसी जिंदल ने साइकिल पर सुनाम के आसपास के गांवों का दौरा कर बेटा और बेटी एक समान होने का लोगों को पाठ पढ़ाया। मानसी जिंदल बताती हैं कि इस मुहिम के दौरान वह लोगों को अपने घरों के बाहर बेटी के नाम से नेम प्लेट लगाने के लिए भी प्रेरित कर रही हैं। सुनाम में कई घरों के आगे बेटी के नाम से नेम प्लेट देखने को मिलने लगी हैं।

एससीसी के फाउंडर प्रतिनिधि एडवोकेट कमल आनंद, डा. विक्रम जिंदल और डा. ज्योति वधवा का कहना है कि क्लब की ओर से तंदरुस्त सेहत के मकसद से एससीसी का गठन किया गया था।

संगरूर के बाहर मानसा में भी पहुंचा संदेश

संगरूरनिवासी बहादुर सिंह राओ मानसा में पंजाब पुलिस में इंस्पेक्टर पद पर नियुक्त हैं जो छुट्टी के दौरान एससीसी के साथ मिलकर संगरूर में साइकिलिंग करते हैं और उसके बाद मानसा में भी लोगों को साइक्लिंग के माध्यम से नशों के बुरे प्रभाव से अवगत करवा रहे हैं।

साइकिलिंग से शारीरिक और मानसिक तंदरूस्ती

डा.विक्रम जिंदल और डा. ज्योति वधवा का कहना है कि साइकिल चलाने से शारीरिक और मानसिक तंदरूस्ती मिलती है। लोगों को अपने जीवन में साइक्लिंग को अपनाना चाहिए क्योंकि साइकिलिंग करते समय हार्ट बीट बढ़ जाती है और खून का संचार भी तेज हो जाता है।

संगरूर: रविवार को संदेश लेकर साइकिल पर निकलती हुई मानसी जिंदल।

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