पावरकाॅम के ~1,018 करोड़ के बिल कंज्यूमर्स के पास फंसे
पंजाबमें बिजली उपभोक्ता 1,018 करोड़ रुपए के बिजली बिल भरने में फेल रहे हैं। 31 दिसंबर 2015 तक की मिली जानकारी में पता चला है कि सरकारी विभागों समेत आम उपभोक्ता भी पीएसपीसीएल को बिल अदा नहीं कर रहे हैं। इसमें करीब आधी राशि सरकारी विभागों की तरफ है। हैरत इस बात की है कि पिछले 15 वर्षों में 148 करोड़ रुपए से बढ़ कर राशि 1,018 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। इसमें सरकारी विभागों की तरफ 497 करोड़ 76 लाख रुपए, जबकि निजी उपभोक्ता 520 करोड़ 52 लाख रुपए भरने में फेल रहे हैं। संगरूर में सबसे अधिक बकाया सरकारी विभागों की तरफ है।
पंजाब स्टेट पॉवर कॉरपोरेशन लिमिटेड से आरटीआई के तहत जानकारी लेने वाले एक्टीविस्ट एडवोकेट कमल आनंद बताते हैं कि यदि आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो 31 मार्च 2001 में 148 करोड़ 27 लाख रुपए के बिल उपभोक्ता भरने में फेल रहे थे 31 मार्च 2005 में सरकारी विभागों का 1 करोड़ 32 लाख रुपए से बिलों का बकाया बढ़ कर 102 करोड़ 21 लाख रुपए तक पहुंच गया, लेकिन 31 मार्च 2009 में सरकारी विभागों की तरफ 59 लाख रुपए ही बकाया थे, जिसके बाद लगातार बढ़ कर 31 दिसंबर 2015 तक बकाया राशि 497 करोड़ 76 लाख रुपए पहुंच चुकी है।
निजी उपभोक्ताओं की बकाया राशि पर गौर की जाए तो 31 मार्च 2001 तक निजी उपभोक्ताओं की तरफ 146 करोड़ 95 लाख रुपए बकाया थे, जोकि प्रति वर्ष बढ़ते चले गए हैं। 31 दिसंबर 2015 तक निजी उपभोक्ताओं की तरफ बकाया राशि बढ़ कर 520 करोड़ 52 लाख रुपए पहुंच चुकी है।
बिजली के दाम बढ़ाने की ओर अधिक ध्यान : कमल नंद
कमलआनंद का कहना है कि सरकार का बकाया राशि लेने की तरफ कम, जबकि बिजली के दाम बढ़ाने की तरफ अधिक ध्यान है। बिजली के दाम बढ़ने से हर उपभोक्ता पर इसका असर पड़ता है, जबकि सरकारी विभागों समेत दूसरे निजी उपभोक्ताओं की तरफ 1,018 करोड़ रुपए बिजली बिल के बकाया खड़े हैं।
संगरूर में सरकारी विभागों की तरफ सबसे अधिक बकाया
संगरूरकी बात की जाए तो संगरूर में 31 दिसंबर 2015 तक शहर के उपभोक्ताओं ने 2 करोड़ 4 लाख रुपए तक के बिजली बिल नहीं भरे थे, जिसमें 2 करोड़ 3 लाख रुपए सरकारी विभागों की तरफ बकाया है, जबकि निजी उपभोक्ताओं की तरफ 96 हजार रुपए ही बकाया राशि है।
काटे जा रहे कनेक्शन
^बकायाराशि भरने की तरफ भी ध्यान दिया जा रहा है। निजी उपभोक्ताओं के कनेक्शन तक काट दिए जाते हैं। सरकारी विभागों को लगातार पत्र लिखे जाते हैं। इस संबंध में सरकार से भी पूरा संपर्क चल रहा है। गुरबचनसिंह, प्रबंधकीय डायरेक्टर, पीएसपीसीएल