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दुखों के सागर को पार करने के लिए सत्संग जरूरी : स्वामी जी
भास्कर न्यूज|सुनाम (संगरूर)
सीतासरधाम में स्वामी शंकर मुनि महाराज ने प्रवचन करते हुए कहा कि धर्म जानने का विषय नहीं बल्कि मानने का विषय है। भगवान तर्क का विषय नहीं बल्कि श्रद्धा और विश्वास का विषय है। भगवान सर्व व्यापक होते हुए भी इंद्रियों से परे हैं और भगवान को इंद्रियों द्वारा पकड़ा नहीं जा सकता परंतु फिर भी इंद्रियां भगवान के इशारों पर चलती हैं। मतलब इंद्रियों को शक्ति भगवान से ही मिलती है।
स्वामी जी ने कहा कि इस संसार में दुखों के सागर को पार करने के लिए सत्संग और भक्ति की जरूरत है ताकि सत्संग करके मनुष्य अपने अशांत जीवन में शांति ला सके और दुखों से छुटकारा पा सके। उन्होंने कहा कि जो भक्ति अथवा धर्म- कामना, वासना, नाम कमाने के लिए, दुखों से मुक्ति पाने के लिए की जाती है वह दोष युक्त भक्ति हो जाती है। मनुष्य द्वारा भगवान का नाम सिमरण करने से उसका भगवान से स्पर्श हो जाता है और भगवान उसे कंचन बना देते हैं। जिस तरह लोहे का पारस से स्पर्श होने पर लोहा सोना बन जाता है उसी प्रकार जीव का भगवान से स्पर्श होने पर भगवानमय हो जाता है। वह समस्त दुखों से मुक्ति पाकर परम शांति प्राप्त करता है। उन्होंने कहा कि संसार को पहले जाना जाता है फिर माना जाता है परंतु भगवान को पहले माना जाता है फिर जाना जाता है।
सुनाम में प्रवचन करते हुए स्वामी जी।