चुनाव के राजनीितक दलों के लिए मायने
शिरोमणी अकाली दल नेछावनी परिषद के चुनाव में झंडा बुलंद करने के बाद अकालियों के हौंसले भी बुलंद नजर रहे हैं। अकालियों ने शहरी क्षेत्रों में हिन्दू कार्ड खेलना शुरू कर दिया है, जिसमें जिला अध्यक्ष से लेकर सर्कल अध्यक्ष तक की बागडोर अकाली दल ने हिन्दूओं को थमा दी है और अकाली लीडरशिप इस तथ्य के लिए भी तैयार बर तैयार नजर रही है अगर छावनी बोर्ड चुनावों की तरह शहर के चुनावों में भी भाजपा के सामने कूदना पड़ा तो वह किसी कीमत में पीछे हटने वाले नहीं हैं। बेशक प्रदेश भाजपा अकाली नेताओं की अोर से नगर निगमों एवं नगर काउंसिलों के चुनाव इकट्ठे लड़ने के बयान दिए जा रहे हैं लेकिन अंदरखाते दोनों पार्टियां हालात बनने पर अपने अपने स्तर पर चुनाव लड़ सकती हैं।
कमजोरीफिलहालनगर में इस समय सबसे क्रिटीकल स्टेज भाजपा की बनती नजर रही है क्योंकि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष कमल शर्मा के साथ स्थानीय पूर्व विधायक सुखपाल सिंह नन्नू का 2006 में शुरू हुआ 36 का आंकड़ा अब 72 के आंकडे में तब्दील हो चुका है। नन्नू किसी भी कीमत पर भाजपा लीडरशिप के आगे सिर झुकाने को तैयार नहीं। सूत्र बताते हैं कि ननू समर्थक शहर के हर वार्ड में सरगर्म हैं और भाजपा द्वारा टिकटों के विरतण में अगर कमल शर्मा गुट आगे रहा तो यह बात पक्की है कि नन्नू समर्थक हर वार्ड में विद्रोह का झंडा बुलंद करते हुए आजाद प्रत्याशियों के रूप में चुनाव मैदान में उतरेंगे।
कांग्रेसपार्टी कांग्रेसकी स्थिति भी कोई बेहत्तर नजर नहीं रही। अभी टिकटों का बंटवारा हुआ नहीं, लेकिन कुछ वार्डों में कांग्रेस पार्टी की टिकट लेने के लिए दो-दो तीन-तीन इच्छुक सामने रहे हैं और इन वर्करों द्वारा खुलेआम कहा जा रहा है कि टिकट ना मिली तो वह आजाद चुनाव लड़ेंगे। विधायक परमिन्द्र सिंह पिंकी के लिए नगर काउंसिल का यह चुनाव अग्नि परीक्षा से कम नहीं होगा क्योंकि छावनी बोर्ड चुनाव के 8 वार्डों में से पिंकी सिर्फ एक सीट पर ही पार्टी को जीत दिलवा पाए। दिन रात कड़ी मेहनत के बावजूद कांग्रेस का छावनी में सुपड़ा साफ हुआ। पिंकी ने छावनी बोर्ड का चुनाव 2017 में होने वाले विस चुनाव की रिहर्सल के रूप में लड़ा था लेकिन परिणाम चौंकाने वाले आए। नगर काउंसिल शहर के चुनाव के बाद यह स्थिति और शहरियों का रूख क्लीयर हो जाएगा कि वोटर पिंकी द्वारा केन्द्र से लाए जा रहे फांडों से करवाए जा रहे विकास कार्यों का ऋण लौटाते हैं या फिर मोदी का जादू वोटरों के सिर चढ़ बोलता है।
ताकतऔर कमजोरी-नगर परिषदके होने वाले चुनावों को लेकर वार्डों की संख्या 25 से बढ़ाकर 31 किए जाने के बाद अकाली-भाजपा के बीच टिकटों के बटंवारे को लेकर ठन गई है। 25 वार्डोंं में से पहले अकाली दल 6 वार्डों में चुनाव लड़ता था, लेकिन अब 6 वार्ड बढ़ने के बाद अकाली दल ने 9 वार्ड ओर बढ़ाकर 15 वार्डो में चुनाव लड़ने की ताल ठोकने के बाद भाजपा नेता पशोपेश में है। छावनी परिषद चुनावों में हुई अकाली दल की जीत के बाद अकाली शहर में भी झंडा गाड़ना चाहते है, लेकिन भाजपा नेता अभी तक अकालियों को ज्यादा सीटें देने के मूड में नहीं लगते। 25 सीटों के अनुपात के बाद अब 31 सीटों के अनुपात के हिसाब से अकाली दल को 8 सीटें मिलना यकीनी है। इस समय अकाली दल द्वारा वार्ड नंबर 10, 11 20 में अलग से सीटों की डिमांड की जा रही है।
अकाली दल के जिला अध्यक्ष नवनीत कुमार गोरा ने कहा कि अकाली दल ने 15 वार्डों में कैंडीडेट उतारने की मांग की है। उन्होंनें कहा कि अकाली भाजपा नेताओं के मध्य बैठकों का दौर जारी है, लेकिन सीटों के बंटवारे को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। गोरा ने कहा कि जल्द ही सहमति बनने की संभावना है।
जिला भाजपा अध्यक्ष जुगराज सिंह ने बताया कि नगर के 31 वार्डों से करीब 150 लोगों ने पार्टी टिकट के लिए एप्लाई किया है। 9 फरवरी को सुबह 9 बजे से 12 बजे तक टाहली मोहल्ला स्थित अग्रवाल धर्मशाला में प्रभारी मोहन लाल सेठी के नेतृत्व में आवेदनों की स्क्रीनिंग का काम किया जाएगा, इसके बाद कैंडीडेट्स की घोषणा कर दी जाएगी।
उधर, कांग्रेस के ब्लॉक शहरी अध्यक्ष रिंकू ग्रोवर ने कहा कि पार्टी टिकट के लिए नगर से करीब 100 लोगों ने आवेदन दिए हैं। जल्द ही आवेदनों की स्क्रीनिंग कर दी जाएगी और पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले लोगों के नाम अनाउंस कर दिए जाएंगे।
इस बार गुरूहरसहाय नगर परिषद दो वार्ड बढ़ाए जा रहे हैं। वर्ष 2008 के चुनाव में कुछ वार्डों में सर्वसम्मति हो गई थी जबकि कुछ में इलेक्शन हुए थे। अध्यक्ष पद पर शिरोमणि अकाली दल की शशि वोहरा बैठीं थीं।
कुल 13 वार्ड हैं। वर्ष 2008 में सर्वसम्मति से कमेटी का गठन हुआ था। अकाली नेता तरसेम सिंह मल्ला को कौंसिल अध्यक्ष बनाया गया था जबकि उपाध्यक्ष का पद भाजपा के लिए रिजर्व रखा गया। इस बार भी 13 वार्डों पर इलेक्शन होने जा रहा है।
नगर काउंसिल चुनावों का ऐलान होते ही मुक्तसर में सियासी गतिविधियां तेज हो गई है। यहां अब की बार 31 वार्ड हो गए हैं, इनमें 39632 पुरुष वोटर एवं 35751 महिला वोटर अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।