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5 महीने से माड़ी नौअबाद स्कूल में स्टूडेंट्स खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर

7 वर्ष पहले
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एकतरफ शिक्षा को प्रफुल्लित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की ओर से करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन असलियत कुछ और ही सामने रही है। आप यह सुनकर हैरान होंगे कि गांव माड़ी नौअबाद में सरकारी ऐलिमेंटरी स्कूल के बच्चे सिर पर छत होने से खुले आसमान के नीचे शिक्षा लेने को मजबूर हैं, जहां बच्चे बैठते हैं, वहीं दूसरी तरफ गहरा छप्पड़ भी बदबू फैला रहा है। स्कूल की बिल्डिंग का अब मटीरियल भी कही दिख नहीं रहा। मटीरियल कहां है कि इसका गांव के सरपंच को भी पता तक नहीं है। यह स्कूल किस हालत में चल रहा है इस बाबत जिला प्रशासन भी पूरी तरह बेखबर है। गांव निवासी कई बार जिला प्रशासन और पंजाब सरकार को लिखती शिकायत कर चुके हैं, लेकिन सरकार है कि मानती ही नहीं। 800 की जनसंख्या वाले गांव माड़ी नौअबाद में सरकारी ऐलिमेंटरी स्कूल सालों से चल रहा है। स्कूल में इस समय 30 के करीब स्टूडेंट पढ़ रहे हैं। गांववासियों के मुताबिक स्कूल की बिल्डिंग कुछ समय से खस्ता हालत में थी।

गांव के सरपंच गुरबिंदर सिंह ने बताया कि करीब पांच महीने पहले वह हरियाणा गया हुआ था। उसकी गैर हाजिरी में ही स्कूल की टीचर पसवक कमेटी ने स्कूल की पूरी बिल्डिंग को पूरी तरह तुड़वा दिया। इसके लिए उसकी सहमति तक नहीं ली गई। आज स्कूल का मटीरियल भी कहीं नजर नहीं रहा। वह कई बार इस बाबत पूछ चुके हैं, लेकिन कोई जवाब देने को तैयार नहीं है। बच्चे धूप में छप्पड़ के किनारे पढ़ रहे हैं। बारिश के दिनों में बच्चे आंगनवाड़ी सेंटर में बिठाए जाते हैं, लेकिन आंगनवाड़ी सेंटर की भी इमारत छोटी होने से बच्चों का बैठना मुश्किल है। स्कूल के पास बने छप्पड़ से गांववासियों ने कई बार सांप निकलते देखे हैं। ऊपर से स्कूल की बिल्डिंग टूटने से और गड्ढे जंगल बन गए हैं।

गांव के सरपंच गुरबिंदर सिंह ने कहा कि वह कई बार इसकी शिक्षा विभाग को शिकायत कर चुका है, लेकिन कोई भी अफसर इस बात पर ध्यान नहीं दे रहा। बच्चे पांच महीने से धूप में आसमान के नीचे बैठ रहे हैं। इधर जिला शिक्षा अफसर (ए) जसपाल सिंह ने कहा कि उन्हें इस स्कूल की हालत के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उसे अब पता चला है। एक दो दिन तक वह खुद गांव का दौरा कर इसकी रिपोर्ट मांगेंगे।

इधर जब स्कूल की टीचर अमनदीप कौर से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि बिल्डिंग पूरी तरह खस्ता हालत में थी। जिसे सरकारी आदेशों के