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रिटायरमेंट के बाद भी हर साल परेड में भाग लेते हैं ये बुजुर्ग सैनिक

7 वर्ष पहले
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होशियारपुर। सेना की नौकरी के दौरान जहां देश की सरहदों की रक्षा करता था, वहीं अब रिटायरमेंट के बाद घर में बैठना अच्छा नहीं लगता है। रिटायरमेंट के बाद सरकार की तरफ से कोई नौकरी भी नहीं मिली। बस सेना की तरफ से पेंशन मिल रही है, पर हमें दुख है कि सरकार ने अभी तक सही मायने में वन रैंक वन पेंशन स्कीम को लागू नहीं किया है। इस कारण अब जो सैनिक रिटायर होकर घर लौट रहे हैं, वे हमसे ज्यादा पेंशन पाते हैं। हमने 1962 के साथ साथ 1968, 1971 के अलावे कारगिल की लड़ाईयां भी लड़ी, लेकिन हमारे दुख-दर्द को सुनने वाला कोई नहीं है।

अपनी दु:ख भरी दास्तां जिले के पूर्व सैनिकों ने रविवार को पुलिस लाईन्स में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह पर दैनिक भास्कर के साथ विशेष बातचीत के दौरान बताई।

बीस सालों से परेड में ले रहे हैं भाग

होशियारपुर जिले को देश में इस बात पर गर्व है कि देश की सेना में आज भी सबसे अधिक सेना इसी जिले से संबंधित हैं। साथ ही देश में सबसे ज्यादा रिटायर्ड फौजी भी होशियारपुर में ही है। सरकार ने होशियारपुर में इनकी सेहत सुविधाओं को ध्यान में रखकर ईसीएचएस(एक्स सर्विसमैन कंट्रीब्यूटरी हेल्थ सिस्टम) अस्पताल के साथ-साथ जनौड़ी ढोलवाहा में स्मारक का भी निर्माण किया हुआ है।

रिटायरमेंट के बाद अपने को बुजुर्ग शब्द से नफरत करने वाले सभी पूर्व फौजियों ने कहा, "सरकार अभी भी हाथ में बंदूके थमा दे तो सरहदों पर दुश्मनों को दिन में भी तारे दिखा सकता हूं, फिर हम बुजुर्ग कैसे हुए। खाली घर में समय नहीं गुजरता है तो हमने 1995 में निर्णय लिया कि जनौड़ी व अतवारापुर के सभी पूर्व फौजी स्वतंत्रता दिवस व गणतंत्र दिवस पर हम भी परेड में भाग लेंगे, जिसे हम आज तक निभाते चले आ रहे हैं।"