पठानकोट. सोमवार देर रात नैनो कार के यूबीडीसी नहर में डूबने के बाद इसमें सवार सगे भाइयों बलवीर व जगदीश ने दरवाजा खोल खुद व अन्य सदस्यों को बचाने की कोशिश की तो पानी का तेज बहाव उनको बहा ले गया। उनके साथ 17 वर्षीय दीक्षा भी पानी में बह गई।
वहीं, कार का पिछला दरवाजा न खुलने से दादी गुलशन कुमारी व पोता साहिल एक-दूसरे से लिपटे रहे और अंदर ही उनकी मौत हो गई। दूसरी कार में उनके पीछे आ रहे परिवार के अन्य सदस्यों को जब नैनो के नहर में गिरने का पता चला तो उनको बचाने के लिए वे चिल्लाए पर रात 12.15 बजे का समय और धुंध होने के चलते 7 घंटे बाद ही शवों को नहर से निकाला जा सका। यह 7 घंटे मृतकों के परिजनों व अन्य लोगों पर कहर बनकर गुजरे तथा वे एक-एक मिनट इस आशा में रहे कि कार से शायद उनके नजदीकी जिंदा वापस आएं, परंतु ऐसा हो न सका।
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