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जज्बा-ए-जिंदगीः खुद पोलियो पीड़ित, मगर कराया कइयों का इलाज...

8 वर्ष पहले
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जालंधर. मन में समाज सेवा की मजबूत इच्छा और बुलंद हौसला हो तो कुछ भी नामुमकिन नहीं। पोलियो के कारण खुद बैसाखी से चलने वाले भार्गव नगर के ओम प्रकाश भगत सैकड़ों बुजर्गों का सहारा बने हुए हैं। मोबाइल रिपेयर का काम करने वाले भगत ने पिछले हफ्ते सरकारी मदद से 50 बुजर्गों की आंखों में लैंस डलवाए। इससे पहले उन्होंने पांच महिलाओं की रसौली और पित्ते की सर्जरी करवाई थी।

ओम प्रकाश भगत कहते हैं-मेरी दोनों टांगों को पोलियो है। मुझे पता है कि शरीर का कोई अंग काम न करे तो पूरा जीवन चक्र बदल जाता है। इसलिए हमने तीन साल पहले ओम वेलफेयर सोसायटी के बैनर तले जरूरतमंद परिवारों व बुजुर्गों को मेडिकल सेवा देने का काम शुरू किया। सबसे पहले पांच महिलाओं का ऑपरेशन करवाया। कपिल अस्पताल ने हमारी मदद की। न्यूनतम खर्च में मेडिकल सेवा दी।

भगत ने इसके बाद राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के प्रति लोगों को जागरूक किया। चौक में कुर्सी पर बैठ जाते। जो पास से गुजरता, उसे ये कार्ड बनाने को कहते। पचास लोगों ने कार्ड बनाया। उनके विभिन्न ऑपरेशन करवाए। उन्हें स्वास्थ योजना के मान्यता प्राप्त डाक्टरों के पास ले गए।

ऑपरेशन का खर्च सरकार ने दिया, लेकिन उसके बाद की खुराक, दवा और देखभाल का जिम्मा भगत और दोस्तों ने पूरा किया है। भगत राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजना के प्रति लोगों को जागरूक कर रहे हैं। कहते हैं जब उन्हें भी नहीं पता था तो पांच महिलाओं के आपरेशन पर करीब एक लाख रुपए खर्च किए।

बीमा योजना के अलावा परिवहन, खान-पान, अस्पताल में रहने आदि का खर्च उनकी सोसायटी करती है। पिछले हफ्ते भगत ने भार्गव नगर और आसपास के इलाकों से पचास बुजुर्गों की आंख के आपरेशन सिविल अस्पताल में करवाए।

अंगदान का संदेश
बकौल भगत उसकी टांगें काम नहीं करतीं हैं लेकिन बाकी शरीर तंदुरुस्त है। मेरे मरने के बाद सारे अंग लोगों के काम आने चाहिए। भगत की बात को सुन थोड़ा भावुक हुए पिता बूटा राम ने कहा-इसकी बातों को सुन मेरा हौसला बढ़ता है। इसके बेटे शिव मणि और मोहित मणि स्कूल जाने लगे हैं। उन्हें पिता से अच्छे संस्कार मिल रहे हैं। हमारे बाद बेटे को सहारे का मोहताज नहीं होना पड़ेगा।