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फाल्गुन के महीने में सावन की झड़ी

9 वर्ष पहले
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अमृतसर . कहते हैं कुदरत के खेल निराले होते हैं। यह निरालापन फाल्गुन के महीने में सावन जैसे लगी बारिश की झड़ी से महसूस किया जा सकता है। इस बारे ज्योतिष और विज्ञान का अलग-अलग मत है।

मौसम का मिजाज:

ऐसा माना जाता है कि फरवरी माह में बारिश कभी-कभार होती है। इसी महीने से शुरू हो जाता है रंगों का महीना फाल्गुन। फाल्गुन को लगे सप्ताह से ऊपर हो चला है। बारिश रह-रह कर हो रही है। मौसम विभाग के मुताबिक पिछले 24 घंटे में 4.6 मिमी बारिश हुई। शनिवार का तापमान अधिकतम 20.4 और न्यूनतम 12.2 डिग्री रहा। अगले 48 घंटों में भी तापमान इसी के आसपास बना रहेगा।

विज्ञान का तर्क:

मौसम के बिगड़े मिजाज को मौसम विभाग वेस्टर्न डिस्टरबेंस यानी पश्चिमी विक्षोभ को जिम्मेदार मानता है। वेस्टर्न डिस्टरबेंस यानी पश्चिमी विक्षोभ बादलों और हवा का वह इलाका है, जो पश्चिम से पूरब की तरफ बढ़ता है। पहले समझा जाता था कि पश्चिमी विक्षोभ भू-मध्यसागर से नमी लेकर आता है, लेकिन ऐसा नहीं है।

यह कैस्पियन सागर से भी नमी ला सकता है। कभी-कभी यह अपने आप ही बन जाता है। सदियों में दिल्ली में आम तौर पर पश्चिमी विक्षोभ की एक पूरी सीरीज आती है, जो अपने साथ बारिश लाती है। ये कोहरे का कारण बनती है, क्योंकि ये नमी में बढ़ोतरी करती हैं।

मौसम विभाग का कहना है कि कैस्पियन सागर से चलने के बाद अफगानिस्तान से होती हुई इन हवाओं ने अरब सागर से भी नमी ली, रही-सही कसर बंगाल की खाड़ी की नम हवाओं ने पूरी कर दी।

ज्योतिष के मुताबिक:

मौसम की इस तब्दीली को ज्योतिष अपने नजरिए से देखता है। ज्योतिषी महंत अविनाश शर्मा कहते हैं कि यह स्थित आज से करीब 16 साल पहले आई थी। वह बताते हैं कि फाल्गुन में बारिश का मुख्य कारण चार ग्रहों सूरज, मंगल, बुध और शुक्र का योग है।

जब भी यह योग बनता है तो मौसम में उथल-पुथल होती है। इस समय शनि वक्री है और रविवार से बुध वक्री हो जाएगा। इसके बाद स्थिति सामान्य की तरफ बढऩे लगेगी। शहरवासियों को गंदगी से निजात दिलाने के दावे करने वाले निगम का अपना कार्यालय ही शनिवार को थोड़ी सी बरसात के बाद झील में तबदील हो गया।

हर बार निगम प्रशासन दावे करता है कि अगली बरसात तक इस समस्या का हल ढूंढ लिया जाएगा, लेकिन वर्षों बाद भी स्थिति ज्यों की त्यों बनी हुई है। उधर, निगम के कमिश्नर भूपिंदर सिंह राय का तर्क है कि ड्रेनेज सिस्टम धीमा होने से यह स्थिति बन जाती है। इसे ठीक करने को कह दिया गया है।