पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • तन को नहीं अपने मन को सजाओ: साध्वी

तन को नहीं अपने मन को सजाओ: साध्वी

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
पटियाला। शिवमंदिर गांव थेडी में आयोजित तीन दिवसीय शिव कथा के तीसरे दिन साध्वी प्रियंका भारती ने सती के विभिन्न जन्मों की दास्तां सुनाई। उन्होंने कहा कि प्रभु का हार श्रृंगार बहुत ही अनोखा और विचित्र था। अगर हम उस श्रृंगार को ध्यान से देखें तो भगवान शिव ने अपने तन के ऊपर भस्म लगाई है और हमें शिक्षा दे रहे हैं कि यह शरीर भस्म के मानिद है। वे बताते हैं इस तन को नहीं बल्कि अपने मन को सजाओ। ताकि वह हरि तुम्हारे मन में आकर अपना आसन ग्रहण करें। भगवान शिव के मस्तक के बीच एक तीसरा नेत्र है जो कि हमें संदेश देता है कि अगर आप को उस परमात्मा को ढूंढना है तो उसको देखने के लिए तृतीय नेत्र यानि दिव्य चक्षु की आवश्यकता है जिससे उस परमात्मा को देख सकते हैं। भगवान श्री कृष्ण भी गीता में कहते हैं कि अर्जुन मुझे कोई भी बाहरी आखों से नहीं देख सकता। मेरे दर्शन के लिए जरूरत है दिव्य दृष्टि की।