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कारोबारी बोले, सेल्फ असेसमेंट का फायदा ही नुकसान

6 वर्ष पहले
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प्रतिभा विरदी। पटियाला v.pratibha@dbcorp.in

एक करोड़ रुपए तक की सालाना कमाई वाले कारोबारियों को सेल्फ असेस्मेंट का अधिकार एक्साइज एंड टैक्सेशन महकमे ने दिया है। इसे लेकर डिपार्टमेंट पूरी तरह से आश्वस्त है कि कारोबारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए स्कीम शुरू की है। जिससे डिपार्टमेंट के करप्शन को रोका जा सके और डीलर फ्रेंडली इस स्कीम का फायदा भी मिले।

इसके उलट कारोबारियों ने कहा कि इस स्कीम से अगर उनको नुकसान नहीं है तो फायदा भी नजर नहीं रहा है। ये स्कीम भी आती तो भी कोई बड़ी बात नहीं थी। पिछले हफ्ते ही सरकार ने कारोबारियों को राहत देने के इरादे से असेसमेंट स्कीम शुरू की है। एक करोड़ रुपए तक के व्यापारी खुद अपनी असेसमेंट करेंगे। उनकी असेसमेंट डिपार्टमेंट का कोई भी इंस्पेक्टर या ईटीओ नहीं करेगा। इसका मकसद करप्शन रोकना और व्यापारी वर्ग को राहत देना है।

सेल परचेज को लेकर अगर व्यापारी को अफसर डिपार्टमेंट में बुलाते हैं तो कारोबारी जाएगा ही। फिर भी देखते हैं कि जो डिपार्टमेंट ने इस स्कीम को लेकर बड़े वायदे किए हैं, वो कितने सही हैं। अगर डिपार्टमेंट की हेल्पलाइन पर शिकायत भी करें तो सुनेगा कौन, डिपार्टमेंट के अफसरों की शिकायत, डिपार्टमेंट के ही अफसरों को करने पर नतीजा व्यापारी के धक्के खाना ही निकलता है। कम से कम स्कीम बनाते वक्त व्यापारियों को तो शामिल किया जाए। जिन दिक्कतों पर काम करने की जरूरत है, उस पर सरकार कुछ नहीं करती है। कारोबारी द्वारा की जाने वाली सालाना असेसमेंट के लिए ईटीओ 10 हजार रुपए तक ले लेते हैं। वकील अपनी फीस चार्ज करता है। कई तारीखें पड़ जाती हैं। हैरेसमेंट अलग से। कारोबारी इनमें उलझा रहता है। कभी ईटीओ तो कभी इंस्पेक्टर पैसा खाते हैं। क्लर्क तक असेसमेंट के लिए रिश्वत की रकम निर्धारित करके रखते हैं। असेसमेंट के लिए कोई पैसा नहीं लगता है।

कारोबारियों को फायदा देगी सरकार की ये स्कीम

^स्कीमकारोबारियों को फायदा पहुंचाने की लिए ही शुरू की है। सीधे-सीधे 2 लाख डीलर्स तो असेसमेंट के दायरे से बाहर हो गए हैं। वो अब सेल्फ असेसमेंट करेंगे। डीलर्स बताते हैं कि असेसमेंट के लिए उनसे महकमे के अफसर पैसा लेते हैं, अकाउंटेंट और वकीलों का अलग खर्च होता है, तो इस स्कीम से 2 लाख डीलर्स का कई सौ करोड़ रुपए तो ऐसे ही बच जाता है। अनुरागवर्मा, कमिश्नर

स्कीम मंे क्या हैं कमियां और क्या चाहते हैं कारोबारी

पटियालाव्यापार बचाओ संघर्ष कमेटी के प्रधान राकेश गुप्ता, उपप्रधान राजेश गर्ग और पंजाब करियाना रिटेलर्स एसोसिएशन के उपप्रधान तरसेम लाल गर्ग का कहना है कि ये स्कीम ऐसी है कि इसका तो कोई फायदा है और ही नुकसान है। करप्शन इससे रुकेगी या नहीं ये तो बाद की बातें हैं पर अगर कोई डिपार्टमेंट अफसर आकर चेकिंग करने लग जाए तो उसे रोका थोड़ी जा सकता है। अगर व्यापारी ने 50 लाख की परचेज की है और सारा खर्च-प्रोफिट-कैरिज वगैरह मिलाकर अगर वो असेसमेंट 60 लाख दिखाता है तो भी डिपार्टमेंट उसे मानता ही है।

तरसेम गर्ग

राजेश गर्ग