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दो दिन में जमा कराएंगे 30 लाख रुपए, बाकी किस्तों में

7 वर्ष पहले
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पटियाला। राजिंदरा जिमखाना क्लब ने हाउस टैक्स के बकाए 86 लाख में से 30 लाख रुपए दो दिनों में निगम में जमा कराने का भरोसा दिया है। बुधवार शाम 4 बजे तक की मोहलत लेने के बाद क्लब सदस्य शाम को निगम कमिश्नर से मिले। उन्हें बताया कि क्लब दो दिनों में 30 लाख जमा कराने के बाकी पैसे किस्तों में अदा कर देगा।

क्लब पर लटक रही सीलिंग की तलवार बहरहाल हटती दिख रही है। उधर कमिश्नर से मीटिंग करने के बाद क्लब के सेक्रेटरी विपन शर्मा ने कहा कि बेशक वो 86 लाख हाउस टैक्स भरने को तैयार हो गए है, लेकिन क्लब आज भी पेमेंट को पूरी तरह गलत मानता है। राजिंदरा जिमखाना क्लब निगम के हाउस टैक्स का करीब 86 लाख का डिफाल्टर है।
दो दिन पहले निगम कमिश्नर ने क्लब को सील करने के ऑर्डर जारी किए थे। क्लब ने बुधवार शाम 4 बजे तक की मोहलत ली थी। क्लब सेक्रेटरी विपन शर्मा पहले दावा कर रहे थे कि चूंकि क्लब की प्रॉपर्टी 1 रु लीज पर है। क्लब टैक्स की श्रेणी में नहीं आती है। इसके बावजूद आज क्लब सदस्यों ने टैक्स की अदायगी करने पर हामी भर दी है।

ये भी हैं डिफाल्टर : राजिंदरा जिम खाना क्लब के बाद अब निगम के निशाने पर सरकारी बिल्डिंग्स है। हाउस टैक्स ब्रांच ने दर्जनों सरकारी बिल्डिंग्स का बहीखाता निकाल लिया है। सर्किट हाउस (डायरेक्टर हॉस्पिटैलिटी) की तरफ 26 लाख रु, आईबी सर्किल की तरफ ढ़ाई लाख रु, राजिंदरा अस्पताल मेडिकल सुपरिंटेंडेंट की तरफ 30 लाख रु, भाखड़ा मेन लाइन विभाग की तरफ सवा लाख रु और जिला परिषद की दुकानों (सरहिंद रोड पर)की तरफ 10 लाख रु निकलते है। माना जा रहा है कि इन सरकारी बिल्डिंग्स के खिलाफ भी निगम जल्द ही कार्रवाई करेगा।
अब तक ऐसा रहा : 22 सितंबर को निगम कमिश्नर, ज्वाइंट कमिश्नर ने हाउस टैक्स की वसूली के लिए संबंधित ब्रांच के असफरों की मीटिंग में क्लब को सील करने का दिया था ऑर्डर।23 सितंबर को सुबह नगर निगम टीम को सील करना था राजिंदरा जिमखाना क्लब। पर पॉलिटिकल प्रेशर के चलते बुधवार शाम चार
बजे तक की मिली मोहलत।
क्या बोले जिम्मेदार :

सीधी बात : इंदू मल्होत्रा, नगर निगम, कमिश्नर

भास्कर: क्लब मामले में क्या बना?

कमिश्नर: 30 लाख दो दिनों में जमा करवाएंगे। बाकी किस्तों में अदायगी होगी।

भास्कर: आपको नहीं लगता किक्लब के साथ ढील बरती जा रही है।

कमिश्नर: नहीं ऐसा नहीं है। इससे पहले तो क्लब का एक पैसा नहीं आया था। अगर सीधी उंगली से कोई टैक्स भर रहा है तो उंगली टेढ़ी करने की क्या जरूरत है?
सीधी बात: विपिन शर्मा, सेक्रेटरी, राजिंदरा जिमखाना क्लब
भास्कर: आप टैक्स भरने को तैयार हो गए है?

सेक्रेटरी: हां, हम जल्द ही टैक्स भर देंगे।

भास्कर: मतलब आप मानते है कि आपका टैक्स सही बना है।

सेक्रेटरी: नहीं, टैक्स गलत है। लेकिन ये सरकार है, कुछ भी कर सकती है। हम मानते है कि हमारी पहले एसोसिएशनों ने इस केस की सही पैरवी नहीं की, जिसके चलते हम आज कमजोर स्थिति में है। बाकी निगम गलत दबाव बना रहा है, इसलिए टैक्स भरने को मजबूर है।
(इंदू मल्होत्रा, नगर निगम, कमिश्नर)