पटियाला। शहर के स्कूलों के खास पब्लिशर्स की किताबें लगाने, हर साल दाखिला फीस लेने समेत फालतू खर्च बंद करने की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे पेरेंट्स इस हफ्ते यह मामला केंद्रीय कानून मंत्रालय के सामने उठाने जा रहे हैं। पटियाला पेरेंट्स एसोसिएशन का वफ्द रविवार को सांसद डॉ. गांधी से मिला और ज्ञापन सौंपा। डॉ. गांधी ने भरोसा दिया कि वो खुद इस हफ्ते पेरेंट्स को साथ लेकर कानून मंत्री को मिलेंगे।
प्राइवेट स्कूलों की तरफ से नियम कानूनों की उड़ाई जा रही धज्जियाें की शिकायत उनसे करेंगे। डॉ. गांधी के साथ मीटिंग करने के बाद पटियाला पेरेंट्स एसोसिएशन ने अपनी कोर कमेटी की मीटिंग प्रधान काका सिंह के नेतृत्व में बुलाई जिसमें फैसला लिया गया कि सोमवार को डीसी रामवीर सिंह से मिलकर उन्हें ज्ञापन सौंपा जाएगा। काका सिंह ने कहा कि अब तक स्कूलों ने अपने वेबसाइट पर किताबों की लिस्ट नहीं डाली है, इसलिए पेरेंट्स एसोसिएशन ने फैसला किया है कि जिला प्रशासन को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया जाएगा। उसके बाद शुक्रवर से जिले भर के पेरेंट्स रैली करेंगे। बात बनने तक उनका विरोध जारी रहेगा।
लिस्ट डाली तो यह मुद्दा बनेगा लोक लहर
पेरेंट्स एसोसिएशन के सुखजिंदर सिंह ने कहा कि वो सोमवार को डीसी से मिलकर साफ कर देंगे कि अगले दो दिन में (बुधवार तक) स्कूलों ने किताबों की लिस्ट वेबसाइट पर डाली तो यह मुद्दा लोक लहर बनेगा। पेरेंट्स एसोसिएशन शहर के सभी स्कूलों के पेरेंट्स को साथ जोड़कर जिले के सभी एमएलए चाहे वो किसी भी राजनीतिक पार्टी के हों, को साथ लेकर शुक्रवार को शहर में बड़ा जनआंदोलन शुरू करेगी।
स्कूलों के किताबों की लिस्ट वेबसाइट पर डालने पर पेरेंट्स आज डीसी को देंगे 48 घंटे का अल्टीमेटम, माने तो शुक्रवार से जिले भर के पेरेंट्स करेंगे रैली
पेरेंट्स एसोसिएशन ने कहा कि जब अदालतों ने यह निर्देश दिए हुए है कि हर साल बच्चे की दाखिला फीस ली जाए तो फिर स्कूल इस तरह के चार्जेज लेकर कोर्ट के आदेशों की अवहेलना कर रहे है। इसके अलावा कोर्ट के आदेशों के बावजूद सीबीएसई स्कूल एनसीईआरटी की बुक्स लगाकर खास प्राइवेट पब्लिशर्स की बुक्स लगवाते है।
इसमें स्कूल हर साल लाखों रुपए कमीशन खाते हैं। एसडीएम ने 10 फरवरी तक स्कूलों को अपने सिलेबस के मुताबिक किताबों की लिस्ट वेबसाइट पर डालने की अपील को स्कूलों ने ठेंगा दिया है, अब उनके पास केंद्रीय कानून मंत्रालय के पास जाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है। हालांकि इस मामले में उनका केस हाईकोर्ट में चल रहा है लेकिन वहां भी पंजाब सरकार अपना कोई भी जवाब अब तक दायर नहीं कर पाई है। मंत्री से माग करेंगे कि इस मामले में सरकार को निर्देश दिया जाए।