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तु छै बांद जौनसरे की, से उत्तराखंड आया याद

5 वर्ष पहले
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गढ़वालीप्रतिनिधि सभा पंजाब और गढ़वाल सभा पटियाला ने संयुक्त तौर पर वीर हकीकत राए मैदान में मेरु मैती सांस्कृतिक कार्यक्रम करवाया। मुख्य मेहमान के तौर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत और विधायक ब्रह्म महिंद्रा पहुंचे। विशेष मेहमान शूरबीर सिंह सजवाण पूर्व मंत्री उत्तराखंड सरकार रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत गायक मुकेश कठैत ने दैणा हुयां खोली का गणेशा गढ़बंदना से की। इसके बाद उत्तराखंड की खूबसूरती को बयां करता गीत तु छै बांद जौनसर की पेश कर मुकेश ने वहां की याद दिलाई। उत्तराखंडी अभिनेता और हास्य कलाकार पन्नू गुसांई ने कॉमेडी की। इसके बाद लोकगायिका हेमा नेगी, गजेंद्र राणा ने प्रस्तुति दी। मंच पर पन्नू शांति, आशा जोशी और अन्य कलाकारों ने प्रस्तुति दी। सीएम हरीश रावत के मंच पर पहुंचने के बाद गजेंद्र राणा ने नंदा देवी राजजात की झलकियां पेश की। सीएम हरीश रावत, विधायक ब्रह्म महिंद्रा और अन्य सियासी नेता भी नतमस्तक हुए। इस दौरान मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि प्रवासी उत्तराखंडी जितनी दिलचस्पी पंजाब के विकास में दे रहे हैं, उससे छाती चौड़ी हो जाती है। बताया कि 2013 में आई प्राकृतिक आपदा के बाद उत्तराखंड फिर से उत्साह से भरा दिखाई दे रहा है। आज पहाड़ की गहत की दाल मोदी की अरहर की दाल को टक्कर दे रहा है। इस दौरान उनके साथ प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय भी मौजूद थे।

यहां गढ़वाली प्रतिनिधि सभा पंजाब के अध्यक्ष उत्तम सिंह बागड़ी, प्रदेश महासचिव, सुरेश धामन्दा, कैशियर हीरा सिंह बिष्ट, गढ़वाल सभा के प्रधान शूरवीर सिंह पंवार, सुरेश चंद्र चमोली, कैशियर मगना नंद पुंडोरा, सरदारा सिंह बिष्ट, गुरमीत सिंह नेगी, रुद्री प्रसाद, उम्मेद सिंह कठैत, गबर सिंह रावत, सुनील डंगवाल, भगवान सिंह कठैत, सुंदर सिंह राणा, गिरीश भट्ठ, विशालमणि सकलानी, रघुनाम सिंह पुंडीर मौजूद थे। कार्यक्रम में कुमाऊं सभा, पाैड़ी गढ़वाल सभा, उत्तराखंड हिलांस सांस्कृतिक कला मंच, उत्तराखंड नौजवान सभा, भ्रातिृ समिति अबलोवाल, कड़ाकेट विकास मंडल, कीर्तन मंडली विर्क कॉलोनी, कीर्तन मंडली विकास नगर का विशेष सहयोग रहा।

सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान लोगों को अभिवादन करते सीएम हरीश रावत।

परंपरागत तरीके से किया गया स्वागत

कार्यक्रमके दौरान पहुंचने वाले लोगों का परंपरागत ढोल, तबला और मशकबाज से स्वागत किया गया। लोगों ने भी इसका भरपूर आनंद लिया। वहीं, मुख्यमंत्री हरीश रावत भी स्वागत के परंपरागत अंदाज देखकर खुश दिखाई दिए।

सुबह से ही उमड़ने लगी थी भीड़

मुख्यमंत्रीके कार्यक्रम में आने को लेकर प्रवासी उत्तराखंडियों में गजब का उत्साह दिखाई दे रहा था। वह सुबह से ही कार्यक्रम में पहुंच गए थे। बड़ों के साथ युवा और बच्चे भी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पहुंचे थे। इस दौरान वे बार-बार गेट की ओर निहार रहे थे। उनके इंतजार की घड़ी 3.55 मिनट में तब खत्म हुई, जब उत्तराखंड के मुख्यमंत्री वहां पहुंचे।

कढ़ी-चावल का लुत्फ

कार्यक्रमके दौरान लोगों द्वारा कढ़ी-चावल का भरपूर लुत्फ उठाया गया। पुरुष-महिलाओं के साथ ही बच्चों ने भी कढ़ी-चावल खाए।

चुस्त दिखी पुलिस व्यवस्था

कार्यक्रमको लेकर पुलिस काफी चुस्त दिखाई दी। मुख्य गेट पर कार्यक्रम में आने वाले लोगों को मेटल डिटेक्टर से गुजरना पड़ रहा था। वहीं, संदिग्ध लोगों की चेंकिंग की जा रही थी।

टेलीफोन डायरेक्टरी का किया विमोचन

उत्तराखंडके सीएम हरीश रावत ने गढ़वाली प्रतिनिधि सभा की टेलीफोन डायरेक्टरी का विमोचन किया। इस दौरान सभा के पदाधिकारियों मुख्यमंत्री को बुके आदि देकर सम्मानित किया।

पटियाला। उत्तराखंडीसांस्कृतिक कार्यक्रम में शामिल होने आए उत्तराखंड क्रांति दल प्रवासी प्रकोष्ठ के उप अध्यक्ष ज्ञानदेव घनश्याली ने उत्तराखंड हिलांस सांस्कृतिक कला मंच की मीटिंग में प्रवासी प्रकोष्ठ को मजबूत बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड क्रांति दल वो पार्टी जिसके आंदोलनों से ही आज उत्तराखंड अस्तित्व में है। उन्होंने कहा कि दल की मांग कि पहाड़ की राजधानी पहाड़ में ही हो, पर किसी भी सरकार ने ध्यान नहीं दिया। क्रांति दल की मांग है कि उत्तराखंड की राजधानी गैरसैण को बनाया जाए। बहादुरगढ़ में सुबह हिलांस मंच के निर्देशक धीरज सिंह रावत के निवास पर हुई मीटिंग में प्रधान हरी सिंह भंडारी, कुवंर सिंह रौंधियाल, रणवीर सिंह रावत, गोबिंद सिंह रावत, दिनेश सिंह चौहान, माधव सिंह बिष्ट, रमेश गुसांई और अन्य सदस्य मौजूद रहे।

सुनीत द्विवेदी। पटियाला

मिशन2017 को लेकर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सूबे के बाहर रहने वाले प्रवासी उत्तराखंडियों की नब्ज टटोलने की मुहिम शुरू कर दी है। इसी कड़ी में वह रविवार को पटियाला पहुंचे। उन्होंने जहां शालीनता से लोगों के बीच जाकर सादगी का परिचय दिया। वहीं, नानकमत्ता, रीठा साहिब और हेमकुंड साहिब के जरिए सिख मतदाताओं पर भी डोरे डालने की कोशिश की। सीएम रावत का प्रोटोकाल तोड़ते हुए जनता के बीच जाना। लोगों का हालचाल लेना। इसके बाद छोटे से बच्चे को गोद में उठा लेना। यह अनायास नहीं है। इसके पीछे कहीं कहीं 2017 का विधानसभा चुनाव है। जिसमें प्रवासी उत्तराखंडी और वहां रहने वाली सिख वोट अहम भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने अपने 15 मिनट के संबोधन में सूबे में अब तक किए गए सभी विकास कार्य गिना दिए। बात चाहे लगातार बढ़ती विकास दर की हो या कलाकारों से लेकर मौलवी तक को पेंशन देने की या फिर बिजली, हाईवे, हेमकुंड साहिब में रोप-वे, नानकमत्ता टू रीठा साहिब एक्सप्रेस वे, दो बढ़ाकर 6 लाख की गई पेंशन योजना आदि की, सभी में वह प्रवासी उत्तराखंडियों काे रिझाने में सफल रहे। सरकार ने बच्ची के जन्म से लेकर 60 साल की उम्र तक महिलाओं के लिए तमाम योजनाएं चल रही हैं। जो अन्य किसी भी राज्य में नहीं है। यहां तक की पंजाब में भी नहीं है। उन्होंने ईको पहाड़ नारे के तहत प्रवासी उत्तराखंडियों को सूबे के विकास के साथ जुड़ने की भी बात कही। कहा कि महिलाएं देवभूमि आकर वहां के विकास में योगदान दें। बकौल सीएम, माताएं-बहनें उत्तराखंड आएं, आपका भाई कुछ नहीं तो धोती लेकर जाएगा। कहीं कहीं मुख्यमंत्री प्रवासी उत्तराखंडियों का देवभूमि से दिली रिश्ता जोड़ गए। हालांकि उनका यह मिशन कितना कामयाब रहेगा, यह तो 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद ही पता चल सकेगा।

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