प्रभु से मिलन हो जाना ही सत्संग: सौम्या
पटियाला। श्रीदुर्गा मंदिर धर्मशाला भादसों में माता श्री नैना देवी डेवलपमेंट कमेटी द्वारा सात दिवसीय श्री राम कथामृत के अंतिम दिन सौम्या भारती ने कहा कि प्रभु श्री राम का व्यक्तित्व ही ऐसा है कि कोई भी कवि उनके चरित्र की महिमा गाए बिना रह ही नहीं सकता। प्रसंग के माध्यम से उन्होंने बताया कि ऋषि विश्वामित्र जी यज्ञ की रक्षा के लिए प्रभु राम और लक्ष्मण जी को वन में लेकर जाते हैं। जहां प्रभु राम ने अहिल्या का कल्याण किया। इसके बाद प्रभु राम और मां सीता का पुष्प वाटिका में मिलन होता है, जो आध्यात्मिक रहस्य है। पुष्प वाटिका सत्संग का प्रतीक है। सत्संग के अर्थ को बताते हुए उन्होंने बताया कि सत्संग दो अक्षरों के सुमेल से बना है। सत्य और संग। भाव कि सत्य के साथ हमारा संग हो जाना। सत्य तो केवल मात्र प्रभु हैं। इसलिए प्रभु से हमारा मिलन हो जाना ही सत्संग है।