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शास्त्रीय गायन में पंजाबी बंिदशों की रिकॉर्डिंग करवा रही पीयू: वीसी

6 वर्ष पहले
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रागजोग एक ताल में विलंबित ख्याल मोरा रे सलोना बलमा घर आई, सुनाकर पंजाबी यूनिवर्सिटी के म्यूजिक डिपार्टमेंट हेड डॉ. निवेदिता सिंह ने भाई मरदाना शास्त्रीय संगीत सम्मेलन को और भी सुरीला बनाया। बुधवार को सम्मेलन के आखिरी दिन शास्त्रीय संगीत की बयार बही। डॉ. निवेदिता ने प्रोग्राम की शुरूआत की और द्रुत ख्याल सवरन के साधे, काहे सो माने को, राग देसी और हमीर में पंजाबी बंदिशों घोल घुमाई दर्शन पैंडे, मैंडड़े यार आई वे और आखिर में काफी की पेशकारी दी। इनके साथ तबले पर संगत जैदेव और हारमोनियम पर अली अकबर ने दी।

डॉ. हरि ओम श्रीवास्तव और अमित श्रीवास्तव की तबले की जुगलबंदी ने दर्शकों का मन मोह लिया। इसमें दोनों ने तीन काल, कायदे, पलटे टुकड़े, परन और चक्करदार बजाकर वाहवाही लूटी। इनके साथ मदन लाल ने हारमोनियम पर संगत की। इसके अलावा पंडित प्रो. साहित्य नाहर ने सितार और पंडित संतोश नाहर ने वायलन पर राग वाचस्पति में जुगलबंदी की। तबले पर पंडित राज कुमार नाहर और डॉ. शोभित नाहर ने तानपुरे पर संगत दी।

समापन समारोह में वीसी डॉ. जसपाल सिंह ने कहा कि यूनिवर्सिटी द्वारा देश के शास्त्रीय गायकों द्वारा संगीत की पंजाबी बंदिशों की रिकॉर्डिंग का काम करवाया जा रहा है। इससे यूनिवर्सिटी के पास शास्त्रीय गायन में पंजाबी बंदिशों का खजाना एकत्र हो जाएगा और हम अपने बच्चों को शास्त्रीय गायन में पंजाबी बंदिशों की तालीम दे सकेंगे। भाई मरदाना संगीत सम्मेलन पंजाब की संगीत परंपरा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। इस दौरान डांस डिपार्टमेंट की पूर्व हेड डॉ. डेजी वालिया को विशेष तौर पर सम्मानित किया गया। डॉ. जगजीत कौर, डाॅ. अमृतपाल कौर डॉ. गुरनाम सिंह, डॉ. कंवलजीत सिंह, डॉ. वरिंदर कौर, मुजतबा हुसैन, डॉ. नवजोत कौर कसेल, परमजीत सिहं सरोआ, डॉ. कंवलजीत सिंह, डॉ. वरिंदर कौर, डॉ. अलंकार सिंह, जसबीर सिंह जवद्दी मौजूद रहे।

भाई मरदाना शास्त्रीय संगीत सम्मेलन के दौरान डॉ. डेजी वालिया को सम्मानित करते वीसी डॉ. जसपाल सिंह अन्य।