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ट्रस्ट की वजह से ही नीलामी फ्लॉप, महज 7 दुकानें बिकी

7 वर्ष पहले
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(छोटी बारादरी में इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट में बोली के दौरान रिजर्व प्राइस को लेकर डीसी से बहस करते बोलीदाता।
पटियाला। इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट ने सोमवार को रिहायशी कमर्शियल प्लाॅटों की नीलामी रखी थी। ट्रस्ट की खुद की लापरवाही से नीलामी फ्लॉप हो गई। शेरांवाला गेट पर सग्गू मार्बल के पास बनी 6 दुकानों को छोड़कर ट्रस्ट की बाकी प्रॉपर्टी नहीं बिकी। ट्रस्ट की पहले बिकी रेजीडेंशियल स्कीमों की लोगों ने नीलामी वाली जगह पर आकर ट्रस्ट की पोल खोल दी। उन्होंने कहा 2009 में लांच रेजीडेंशियल स्कीमों में अभी तक बिजली-पानी-सीवर जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं दी जा सकी है।
ट्रस्ट अब और स्कीमों को बेचकर लोगों की आंखों में धूल झोंके। ट्रस्ट ने नीलामी के इश्तिहार में बताई गई रिजर्व प्राइज से बोली कहीं ज्यादा रेट पर शुरू करवाई गई। लोगों ने यह कहकर विरोध किया कि ट्रस्ट ने रिजर्व प्राइज कम बताकर लोगों को धोखे से यहां बुलाया है। शेरांवाला गेट को छोड़कर सभी स्कीमों के प्लाॅट बिकने से रह गए।
नीलामी कराने के लिए ट्रस्ट चेयरमैन डीसी वरुण रुजम, एडीसी महिंदर पाल, एसडीएम गुरपाल चहल सहित प्रशासनिक अफसर ट्रस्ट ऑफिस पहुंचे। ट्रस्ट ने नीलामी के इश्तिहार में जो रिजर्व प्राइज बताया था। मौके पर बोली उससे कहीं ज्यादा से शुरू कराई। जैसे महाराजा नरिंदरा इन्क्लेव में कमर्शियल प्लाॅट की रिजर्व प्राइज ब्रॉशर में तो 13 हजार 310 प्रति वर्ग गज बताई गई थी।
नीलामी 17 हजार 100 रु प्रति वर्ग गज से शुरू की। ईओ जीएस सोढी ने कहा कि पहले बेची हुई किसी भी तरह की प्रॉपर्टी जिस रेट पर बिकी है, बोली उसी रेट से शुरू की जाएगी, कि रिजर्व प्राइज से। इस पर बोलीकार भड़के उठे। लोगों ने कहा कि ट्रस्ट को यह शर्त पहले इश्तिहार में दर्ज करनी चाहिए थी। हम सभी रिजर्व प्राइज देखकर नीलामी पर पहुंचे है।

- इश्तिहार में बताए रिजर्व प्राइज से ज्यादा रेट पर शुरू कराई बोली
रियल इस्टेट में मंदी के चलते नीलामी फेल : बीएचप्रॉपर्टीजप्राइवेट लिमिटेड के एमडी भूपिंदर सिंह के मुताबिक रियल एस्टेट के कारोबार में मंदी नीलामी फेल होने का सबसे बड़ा कारण है। पंजाब सहित पटियाला में भी रियल एस्टेट का कारोबार मंदी में है। लोग अब प्रॉपर्टी में इनवेस्ट करने से कतराते हैं। उन्हें पता है कि एक बार पैसा इनवेस्ट करके उतनी आउटपुट नहीं आएगी।
कुमार प्रॉपर्टीज के एमडी कुमार प्रवीण के मुताबिक इस फेल्योर के पीछे कहीं कहीं ट्रस्ट भी बराबर का जिम्मेदार है। ट्रस्ट की पहले काटी कालोनियों में अगर लोगों को सही बुनियादी सुविधाएं मिलती तो लोग नीलामी में बढ़ चढ़ कर भाग लेते। ऐसे में लोग क्यों ट्रस्ट की स्कीमों में पैसा इनवेस्ट करेंगे। ट्रस्ट को कार्यप्रणाली सुधारनी होगी।

कॉलोनियों में कमी को जल्द दूर किया जाएगा: ईओ
इम्प्रूवमेंटट्रस्ट ईओ जीएस सोढ़ी ने कहा कि हम अपनी काॅलोनियों में सभी तरह की सुविधाएं देेते है। इसके बावजूद अगर कहीं कोई कमी है तो उसे जल्द दूर किया जाएगा। जहां तक नीलामी में प्लाट बिकने का मुद्दा है तो हम ग्राहक देखकर प्रॉपर्टी सेल करते है। यह हमारा अधिकार है कि हम कभी भी किसी भी स्टेज पर बोली स्थगित कर सकते हैं।

बोली हुई, ग्राहक आए, फिर भी नहीं बेची प्रॉपर्टी
सत्याइनक्लेव (महिंदरा काॅलेज के सामने) बनी दुकानों की रिजर्व प्राइज 25 लाख प्रति दुकान थी। दुकान पर बोली चढ़ते चढ़ते 28 लाख तक पहुंच गई। बावजूद ट्रस्ट अधिकारियों ने यह कहकर प्लाट देने से मना कर दिया कि वो इस शॉपिंग कंप्लेक्स को डेवलप करके बेचेंगे। बोलीकारों ने कड़ा एतराज जताया। मामले को मंत्री तक लेकर जाने की बात भी कही।

क्यों नहीं बिके प्लाॅट : महाराजा नरिंदरा इन्क्लेव में 2009 में प्लाॅट लेने वाले गुरदयाल सिंह ने बताया कि 5 साल में ट्रस्ट कॉलोनी में बिजली कनेक्शन नहीं दे पाया है। कॉलोनी में प्लाॅट लेने वाले लोगों ने पहले इंजन रखकर मकान डाले। अब टेंपरेरी बिजली कनेक्शन लेकर 13 रु प्रति यूनिट बिजली लेने पर मजबूर है। सड़कें, सीवर, स्ट्रीट लाइट का अता पता नहीं है। इसके बावजूद ट्रस्ट लोगों से 2009 से जुर्माना वसूल रहा है।

- एसएसटी नगर में 3 महीनों से दोनों ट्यूबवेल बंद है। महाराजा यादविंद्रा इन्क्लेव में 2 महीनों से स्ट्रीट लाइट ठप है। सड़कों पर 17 लाख रु लगाकर पैचवर्क लगाए, लेकिन पैचवर्क 4 दिन भी चले। अब फिर से सड़कों पर गड़्ढे है।