पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • 9 कॉलेज टीचर्स अयोग्य करार, अपना सब्जेक्ट छोड़ कुछ और ही पढ़ा रहे थे

9 कॉलेज टीचर्स अयोग्य करार, अपना सब्जेक्ट छोड़ कुछ और ही पढ़ा रहे थे

6 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
राज्यके एकमात्र सरकारी आयुर्वेदिक काॅलेज में फिर तालाबंदी के आसार बन गए हंै। सेंट्रल कौंसिल ऑफ इंडियन मेडिसन (सीसीआईएम) ने काॅलेज के 9 टीचर्स को अयोग्य करार देते हुए टीचर कोड जारी करने से मना कर दिया है। अयोग्य टीचर्स में एक्स प्रिंसिपल डॉ. प्रदीप कपिल और आयुर्वेदिक अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डाॅ. राकेश सिंगला भी शामिल हंै।

सीसीआईएम के मैंबर डाॅ. जगजीत सिंह ने बताया, ये सभी टीचर्स लंबे समय से अपने सब्जेक्ट को छोड़ अन्य सब्जेक्ट पढ़ा रहे हैंै। काॅलेज की मान्यता के लिए रेगुलर फैकल्टी 35 होने चाहिएं, लेकिन अब 9 टीचर्स के अयोग्य करार होने के बाद 26 रह गए हंै। इधर काॅलेज प्रबंधन ने प्रोफेसर/रीडर के पदों पर योग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति करने के लिए केस बनाकर सरकार को भेज दिया है।

आयुर्वेदिक काॅलेज 1900 में अस्पताल के तौर पर शुरू हुआ था। स्टूडेंट्स वैद्य बनकर निकलते थे। 1952 में काॅलेज बनाया गया। एफिलिएशन बाबा फरीद यूनिवर्सिटी से मिली। मान्यता सीसीआईएम से। काॅलेज में बीएएमएस पीजी में एमडी कोर्स शुरू हुआ। एमडी 1992 में बंद हो गई।

सरकारी आयुर्वेदिक काॅलेज में बीएएमएस की फीस 13 हजार 500 प्रति साल। 5 साल के कोर्स की फीस करीब 68 हजार रुपए है। प्राइवेट काॅलेजों में मैनेजमेंट कोटे में लगभग 8 लाख और टेस्ट के जरिए आने वाले स्टूडेंट्स से लगभग 4 लाख रुपए प्रति कोर्स फीस है।

सीसीआईएम द्वारा अयोग्य करार हुए टीचर्स में डाॅ. कृष्ण कुमार चोपड़ा, डाॅ. हरविंदर ग्रोवर, डाॅ. रघुवीर सिंह, डाॅ. सतेंद्र कपूर, डाॅ. प्रदीप कपिल, डाॅ. शरदिंदु शर्मा, डाॅ. प्रवीन कुमार, डाॅ. विनोद कुमार मित्तल डाॅ. राकेश सिंगला का नाम शामिल है।

काॅलेज मेंपिछले 3 सालों से भी दाखिला बंद रहा था। असल में सीसीआईएम की टीम आयुर्वेदिक काॅलेज/अस्पताल का हर साल निरीक्षण करती है। टीचर्स की कमी से दो सालों तक कालेज को मान्यता ही नहीं मिली। बीएएमएस में दो सालों से नया दाखिला भी के बराबर रहा। अब किसी तरह स्टॉफ की संख्या 35 हुई थी।इस समय बीएएमएस के फर्स्ट ईयर मेंे 40 स्टूडेंट्स हंै। 9 टीचर अयोग्य होने से इनके भविष्य पर भी संकट छा गया है।

सीसीआईएम केमेंबर डॉ. जगजीत िसंह ने बताया, हां! यह सही है कि हमने 9 टीचरों को अयोग्य करार देते हुए टीचर कोड जारी करने से मना कर दिया है। इसमें मैं दोनों पक्षों को बराबर का दोषी मानता हूं। ये टीचर सालों से अपना विषय छोड़कर दूसरा विषय पढ़ा रहे थे, तब सीसीआईएम को क्यों याद नहीं आया? अब सरकार को काॅलेज को बचाने के लिए कोई रास्ता निकालना होगा। आयुर्वेदिक कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. अश्विनी शर्मा के मुतािबक मुझे इन टीचर्स के अयोग्य होने का सीसीआईएम से लेटर मिल गया है। अब हमारे पास हायर फैकल्टी की कमी हो गई है, इसलिए हमने प्रोफेसर/रीडर के पदों पर योग्य उम्मीदवारों को भरने के लिए केस बनाकर सरकार को भेज दिया है।