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बैंक मुलाजिमों ने मांगा ओवरटाइम

5 वर्ष पहले
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8नवंबर की रात नोटबंदी के बाद दिन-रात की ड्यूटी ने बैंकर्स को परेशान कर दिया है। किसी को पीठ दर्द तो कोई को मेंटल स्ट्रेस से बीमार हो गया है। राहत दो महीने बाद भी नहीं मिली। अभी तक कैश की सप्लाई दुरुस्त नहीं हुई। जब भी शाखाओं में उपलब्ध कैश बंट जाता है, तो लोग स्टाफ से बहस करते हैं। दुखी होकर अब बैंक मुलाजिमों ने 7 फरवरी को हड़ताल का ऐलान किया है।

केंद्र सरकार को हड़ताल का नोटिस भी दे दिया गया है। नोटबंदी के दौरान औसतन हर बैंकर ने 12 घंटे काम किया। मुलाजिमों का कहना है कि हमें सरकार की तरफ से अतिरिक्त मेहनताना मिलना चाहिए था। सरकार ने इसका कोई प्रावधान नहीं किया है। ऊपर से अभी तक बैंक शाखाओं में कैश की उपलब्धता सामान्य नहीं हुई। ओवरटाइम समेत अन्य मांगों को लेकर पंजाब बैंक कर्मचारी फेडरेशन और एबीआईओए के आह्वान पर स्टेट बैंक ऑफ पटियाला हेड ऑफिस के आगे धरना दिया गया। कॉमरेड एसके गौतम, विनोद शर्मा, राकेश चौधरी, हरजीत सिंह और अशोक शर्मा ने धरने को संबोधित करते कहा कि ऑल इंडिया बैंक कर्मचारी संघ (एआईबीईए), ऑल इंडिया बैंक अधिकारी संघ (एआईबीओए) और बैंक कर्मचारी फेडरेशन ऑफ इंडिया (बीईएफआई) के बैनर तले 5 लाख से ज्यादा कर्मचारियों अधिकारियों की ओर से इस हड़ताल में हिस्सा लिया जाएगा।

स्टेट बैंक ऑफ पटियाला हेड ऑफिस के गेट कआगे रोष प्रदर्शन करते बैंक मुलाजिम।

ये हैं बैंक मुलाजिमों की मांगें

{ज्यादातरबैंक आज भी नकदी की जरूरत पूरी करने में असमर्थ हैं। क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और को-ऑपरेटिव बैंकों समेत सभी बैंकों, शाखाओं में नकदी की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।

{अधिकांश एटीएम खाली पड़े हैं। सभी एटीएम में तुरंत नकदी भरी जाए।

{सरकार द्वारा 50 दिन के वादे के बावजूद ग्राहकों को अभी भी प्रतिबंधित नकदी दी जा रही है। ग्राहकों द्वारा नकदी की निकासी पर सभी प्रतिबंधों को हटाया जाए।

{निजी बैंकों द्वारा खुले दिल से नकदी दी जा रही है। बैंकों की नकदी की आपूर्ति में भेदभाव को रोका जाए। नए नोटों की स्टोरेज की सीबीआई जांच हो।

{नोटबंदी के चलते बैंक स्टाफ और आम पब्लिक जिन्होंने किसी वजह से अपनी जान गंवाई, उनके लिए मुआवजा जारी हो।

{बैंक स्टाफ के साथ शोषण को रोकने के लिए सभी बैंक कर्मचारियों अौर अधिकारियों के लिए कानून एवं व्यवस्था बनाई जाए।

{पिछले महीनों में कर्मचारियों और अधिकारियों द्वारा अतिरिक्त काम/देर तक काम करने के लिए ओवरटाइम दिया जाए।

{1 करोड़ या इससे ज्यादा के बैंक लोन डिफाल्टरों का नाम प्रकाशित किया जाए, लोन की रिकवरी हो। लोन को बट्टे खाते में डाला जाए। ज्यादा डीआरटी एवं फास्ट ट्रैक ट्रिब्यूनल स्थापित किए जाएं। जानबूझ कर की गई चूक को आपराधिक गतिविधि घोषित किया जाए।

{नोटबंदी की असफलता का दोष बैंक मुलाजिमों पर लगाया जा रहा है जबकि कारण कुछ अलग हैं। इसकी सीबीआई जांच की जाए।

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