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इस्लाम की शिक्षाओं को गलत पेश कर रहे जेहादी
}पद्मश्री सुरजीत पातर ने कहा कि सूफी सदा लोक सभ्याचार के हिमायती
भास्करन्यूज | पटियाला
इस्लामकीशिक्षाओं को गलत तरह से पेश कर जेहादी निर्दोष लोगों को मार रहे हैं। शांति के इन दुश्मनों को अल्हा कभी माफ नहीं करेगा। जेहाद बहुत ही कट्टरपंथी शब्द है और हमारा इससे लेना देना नहीं है। अफगानिस्तान की आवाम और प्रशासन मानवता में विश्वास रखती है। यह बात अफगानिस्तान के डिप्टी हाई कमिश्नर एम अशरफ हैदरी ने पीयू में \\\'सूफीमत और सिखमत के आपसी संबंध\\\' विषय पर शुरू दो दिवसीय इंटरनेशनल काॅन्फ्रेंस में कही।
बाबा फरीद सेंटर फॉर सूफी स्टडीज की ओर से कराई जा रही काॅन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब में दर्ज बाबा फरीद की वाणी से धर्मों की एकता की बात करती है। अफगानिस्तान में गुरु नानक देव जी की उदासियों के दौरान बिना किसी धार्मिक भेदभाव के लोगों के साथ किए संवाद सूफीवाद और सिखमत की सांझ का प्रमाण हैं।
उद्घाटनी भाषण में पद्मश्री सुरजीत पातर ने कहा कि सूफी सदा लोकपक्षीय और लोक सभ्याचार के हिमायती रहे हैं। उन्होंने सूफी और सिखमत की एकता के बारे में बात करते हुए इश्क हकीकी (आध्यात्मिक प्रेम) पर बात की। पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ के पूर्व प्रोफेसर डाॅ. नरेश ने गुरु नानक देव के तौहीद के संकल्प के प्रचलन को सूफी और सिखमत की सांझ का बुनियादी आधार बताया। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक लड़ाइयों में सत्ता के विरोध में गुरु साहिबानों से सूफियों और मुसलमान साधकों का सहयोग देखने वाला है।
वीसी डाॅ. जसपाल सिंह ने कहा कि ये बहुत कम लोग जानते हैं कि गुरु नानक देव जी ने अफगानिस्तान में अलग-अलग जगहों पर उदासी की थी। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी में सूफीमत के संदर्भ में पंजाबी के हवाले से बहुत काम हो रहा है। इस कड़ी में सेंटर की अगली मुहिम इनसाइक्लोपीडिया ऑफ सूफिज्म है। जिसे जल्द ही प्रकाशित करने के लिए योजना बना ली है। रजिस्ट्रार डाॅ. दविंदर सिंह ने काॅन्फ्रेंस के बारे में बताया। सेंटर डायरेक्टर डाॅ. नासिर नकवी, एडिशनल डायरेक्टर डाॅ. धनवंत कौर ने भी अपने विचार दिए। सेंटर द्वारा प्रकाशित महकमे की मैगजीन घनशकर रिलीज की।
पीयू में सूफी सेमिनार के दौरान सेंटर मैगजीन रिलीज करते एम अशरफ हैदरी, वीसी डाॅ. जसपाल सिंह, सुरजीत पातर अन्य।