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नाकों की वीडियो पुलिस कंट्रोल रूम में बैठ देखने की योजना फेल
पुलिसनाकोंकी वीडियो कंट्रोल रूम में बैठकर देखने की ई-पुलिसिंग योजना टेस्ट में पास होने के बावजूद अमल करने में फेल हो गई है। पूर्व एसएसपी गुरप्रीत सिंह गिल के टाइम में पटियाला को इसका पायलट प्रोजेक्ट मिला था। प्राइवेट कंपनी के साथ एग्रीमेंट खत्म होते ही यह योजना भी फेल हो गई है।
पुलिस नाकों पर लोगों की मुलाजिमों के खिलाफ शिकायत लोगों को बेहतर सेवाएं देने के लिए इस प्रोजेक्ट को लागू किया जा रहा था। इसे अच्छी योजना बताते हुए पूर्व एसएसपी गिल ने रिपोर्ट उच्च अधिकारियों के पास भेजी और इसे लागू करने के लिए हरी झंडी भी मिली थी। प्राइवेट कंपनी के साथ पुलिस विभाग का एग्रीमेंट खत्म होने के बाद फंड की कमी के चलते इसे रिन्यू नहीं किया जा सका। ई-पुलिसिंग पर लगी ब्रेक के हटने के आसार नहीं रहे।
यहथा प्रोजेक्ट का मकसद: प्रोजेक्टके अनुसार यदि किसी थाने की ओर से नाका लगाया जाना था तो मोबाइल फोन के जरिए उसकी वीडियो रिकार्डिंग करनी थी, इसे पुलिस कंट्रोल रूम के साथ जोड़ा गया था। सॉफ्टवेयर लोड करने के बाद इस रिकार्डिंग को लाइव पुलिस कंट्रोल रूम में एसएसपी देख सकते थे। इस योजना का मकसद था कि पुलिस नाकों पर चैकिंग के दौरान पब्लिक को परेशान करने के आरोपों से डिपार्टमेंट को बचाया जा सके। यही नहीं पब्लिक को भी नाके के दौरान किसी भी तरह की असुविधा होने पर उसकी रिकार्डिंग उच्च अधिकारी कंट्रोल रूम में देखने के बाद तुरंत कार्रवाई करवा सकते थे। योजना को टैस्ट करने के लिए थाना लाहौरी गेट सिविल लाइन पुलिस को यह मौका मिला था। इन थानों के इंचार्ज ने नाकों पर जाकर वीडियो बनाकर डायरेक्ट कंट्रोल रूम में दिखाई थी। एक समय में करीब एक घंटे तक लगातार वीडियो कैप्चर की जा सकती थी।
कंपनी का करार खत्म होने पर फेल हुआ प्रोजेक्ट
एसपी(हेडक्वार्टर) राकेश कुमार ने कहा कि प्रोजेक्ट पुराना, बहुत अच्छा था। प्राइवेट कंपनी के साथ एग्रीमेंट खत्म होने के कारण यह योजना फेल हुई है, जिसका कारण फंड की कमी रही। मामला सुलझाना राज्य स्तर के अधिकारियों के हाथ में है, जिला स्तर पर इसे पास कर दिया था।