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रिसर्च इंस्टीट्यूशंस का इंट्रस्ट प्रेक्टिकल में

7 वर्ष पहले
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\\\'आधुनिकदौरमें रिसर्च बेस्ड इंस्टीट्यूशंस प्रेक्टिकल एजुकेशन की तरफ दिलचस्पी ले रहे हैं। जिससे रिसर्च वर्क की बजाए टीचिंग वर्क अहम स्थान ले चुका है।\\\' यह विचार संस्थान नाद प्रगास द्वारा अरविंद पाल सिंह मंडेर की किताब \\\'रिलीजन एंड स्पेक्टर ऑफ वेस्ट- सिखिज्म, इंडिया, पोस्टक्लोनेलेटी एंड पॉलिटिक्स ऑफ ट्रांसलेशन\\\' पर कराए सिंपोजियम में प्रो. जेपीएस ओबराए ने कहे।

डीयू के पूर्व प्रोफेसर जेपीएस ओबराए ने कहा कि मौजूदा जिंदगी निजी फायदों पर केंद्रित हो चुकी है। पीयू के पूर्व प्रो. डॉ. बलकार सिंह मुख्य मेहमान और डॉ. हरजीत सिंह गिल विशेष मेहमान रहे। खालसा कॉलेज से डॉ. दीपइंद्रजीत कौर रंधावा भी पहुंची। यहां मिशीगन यूनिवर्सिटी अमेरिका से पन्नू जैतला, अमनदीप सिंह, अमृतसर से नवजोत कौर, अमनिंदर सिंह, सुखविंदर सिंह, दमनजीत सिंह, मनिंदरजीत कौर, डॉ. जसविंदर सिंह, प्रो. हरपाल सिंह पन्नू, डॉ. गुरमीत सिंह सिद्धू, डॉ. परमवीर सिंह, प्रो. हिम्मत सिंह, डॉ. कुलवंत सिंह ग्रेवाल, डॉ. प्रवीन कुमार, डॉ. केहर सिंह, डॉ. अनुराग सिंह, हरसिमरन सिंह, प्रो. बलविंदरपाल सिंह, प्रो. अवतार सिंह, सरबजीत सिंह, प्रो. शाम सिंह, प्रो. हरपाल सिंह बंगा, गुरप्रीत सिंह, अरविंदर सिंह, प्रितपाल सिंह परविंदर सिंह मौजूद रहे।

नाद प्रगास संस्था द्वारा करवाए सिंपोजियम में बोलते हुए प्रो. जेपीएस ओबराए।