पॉलिसीज को चाहिए साइंटिफिक अप्रोच
\\\"सरकार के प्लानिंग कमीशन के बारे में मुझसे क्यो जानना चाहते\\\'
पटियाला | देशकी इकोनॉमिक पॉलिसीज को साइंटिफिक अप्रोच की जरूरत है। कुछ ऐसे इश्यूज हैं, जिन पर अभी भी काफी काम होना बाकी है। इसमें गरीबी, रीजनल असमानता और इनकम में असमानता प्रमुख तौर पर शामिल हैं। यह बात देश के प्लानिंग कमीशन के पूर्व डिप्टी चेयरमैन मोंटेक सिंह आहलूवालिया ने पीयू में इंडियन इकोनोमीट्रिक सोसायटी की 51वीं सालाना कॉन्फ्रेंस में कही।
तीन दिवसीय कॉन्फ्रेंस के पहले दिन उद्घाटन करने के बाद उन्होंने कहा कि इन इश्यूज पर राज्य स्तरीय एनालिसिस करने की जरूरत है। पर ये एनालिसिस राज्य में ही होने चाहिए। उन्होंने कहा कि कोई भी इनक्लूसिवनेस पॉलिसी ज्यादा देर तक नहीं चल सकती। अब असमानता अमीर और बहुत ज्यादा अमीर के बीच में चुकी है। कमाई का एक हिस्सा टॉप एक फीसदी पॉपुलेशन के पास जा रहा है। इसी तरह के बहुत से अन्य इश्यू भी हैं, जिन पर सिर्फ इकोनोमिस्ट को काम करने के लिए आगे आना होगा बल्कि मीडिया को भी सहयोग करना होगा। उन्होंने कहा कि मैन्युफेक्चरिंग सेक्टर में स्किल्स पैदा करने में सफलता नहीं मिली है। इसके कारणों को ढूंढना चाहिए। छोटे बिजनेस को छूट देनी चाहिए। गरीबी हटाने को लेकर भी पॉलिसीज बननी चाहिए।
इकोनॉमिक्स डिपार्टमेंट द्वारा कराई कॉन्फ्रेंस में सोसायटी के उप प्रधान डाॅ. पम्मी दुआ ने प्रधानगी भाषण दिया। इसमें उन्होंने इकोनॉमिक्स की आजादी के बारे में बात की। मोंटेक सिंह ने कहा कि यहां भाग लेने वाले डेलिगेट्स के पेपर एब्सट्रेक्ट में पढ़ने के बाद ही वो उन्होंने ये बातें कहीं है कि अभी भी बहुत से मसलों पर काम होना बाकी है।
स्टेट प्लानिंग बोर्ड के डायरेक्टर एचएस ढिल्लों ने अपने विचार दिए। डिपार्टमेंट हेड और कॉन्फ्रेंस के आॅर्गेनाइजिंग सेक्रेट्री डाॅ. इंद्रजीत सिंह, को-आर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी डाॅ. लखविंदर सिंह, डाॅ. एनआर भानुमूर्ति, डाॅ. एएस चावला अन्य ने जानकारी दी। कॉन्फ्रेंस में देश और विदेश से 300 के करीब डेलिगेट्स भाग ले रहे हैं।
राष्ट्रपति की सहमति से संशोधन अच्छा कदम
वर्तमानसरकार ने राज्यों को लेबर लॉ में राष्ट्रपति की सहमति से संशोधन करने की मंजूरी देकर एक अच्छा कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि इसे लेकर राजस्थान सरकार ने उदाहरण पेश की। इसे बाकी राज्य भी फॉलो करेंगे। राजस्थान में लेबर लॉ के ख