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निगम ने डेढ़ साल बाद भी नहीं बनाया डेथ सर्टिफिकेट

7 वर्ष पहले
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पटियाला. निगम में जन्म मौत सर्टिफिकेट लेना आसान नहीं रहा। सांसद डॉ. धर्मवीर गांधी के तीन बार सिफारिश करने के बावजूद डेढ़ साल बाद भी क्लर्कों ने ईश्वर सिंह को पिता अमृत सिंह का डेथ सर्टिफिकेट जारी नहीं किया। पातड़ां के ईश्वर ने बताया कि 11 मार्च 2013 को पिता की डॉ. गांधी के क्लीनिक के बाहर हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। 5 अप्रैल को उसने डेथ सर्टिफिकेट के लिए नगर निगम में अप्लाई किया।
निगम क्लर्कों ने लेट मामला बताते हुए डेढ़ साल में 3 बार फीस भरवाई। इसके बावजूद जब सर्टिफिकेट नहीं बना तो उसने सांसद डाॅ. गांधी को शिकायत दी। उन्होंने मंदीप सिंह को फोन कर सर्टिफिकेट जारी करने को कहा। डाॅ. गांधी ने तीन बार लिखकर दिया कि उनके क्लीनिक में दाखिल होने से पहले अमृत सिंह की मौत हो गई थी। इसलिए उसका डेथ सर्टिफिकेट जारी किया जाए। ईश्वर ने बताया कि सुविधा मुलाजिमों ने सर्टिफिकेट जारी करने से पहले मिलने वाले टोकन में डेथ की जगह बर्थ सर्टिफिकेट लिख दिया। अब फिर निगम क्लर्क मंदीप सिंह ने फाइल पर आब्जेक्शन लगाकर उसे सुविधा सेंटर भेज दिया है।

शिकायतकर्ता का केस ही लेट था: डीलिंग क्लर्क

निगमके डीलिंग क्लर्क मंदीप सिंह ने बताया कि शिकायतकर्ता का केस ही लेट था। सुविधा ने जो टोकन काटा है, उसमें डेथ की जगह बर्थ सर्टिफिकेट लिखा है। इसे चेंज करने को भेजा है। दो दिन पहले शिकायतकर्ता आया और धमकी दी, कि सभी उसकी मिन्नतें करेंगे।

फाइल में देरी, रिश्वत की पेशकश: डाॅ. गांधी

सांसद डाॅ. गांधी ने बताया कि तीन बार लिखकर देने स्टाफ को फोन करने के बावजूद अब तक सर्टिफिकेट नहीं बन पाया है। केस सही है, क्लर्क फाइल को लटकाने की कोशिश कर रहे हैं। मतलब साफ है कि वह रिश्वत चाहते हैं।