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कश्मीर में बाढ़ का मंजर देखने वाले एडवोकेट मनिंदर सिंह उनके साथियों ने कहा, परमात्मा दा शुक्र घर गए

7 वर्ष पहले
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पटियाला. हैलीपैड ते चार दिन सुक्की ब्रेड नाल पेट भरना पया। हर आदमी पेट भरन लई रोटी नूं लब्भदा देखेया। पीण लई पाणी वी नहीं मिल रेहा सी। मन विच्च बस एही चलदा रेहा कि जान बच जावे ते कदों घर पहुंचिए। प्रशासन अते पुलिस ने किसे वी आदमी दी मदद नही कीती। बस बीएसएफ अते सेना दे जवानां ने ही लोकां दी जान बचाई।

कश्मीर में आई बाढ़ का ऐसा खौफनाक मंजर अभी भी एडवोकेट मनिंदरपाल सिंह साही के जेहन में ताजा है। एडवोकेट मनिंदर तीन दोस्तों एडवोकेट तेजिंदर सिंह पुनिया, एडवोकेट खुशबीर सिंह एडवोकेट प्रितपाल सिंह ढिल्लों के साथ कश्मीर की हरी भरी वादियां देखेने के लिए पांच सितंबर को गए थे। 7 सितंबर को घाटी में आई बाढ़ ने उनका एक बार तो मौत से सामना करा दिया था। मनिंदर दोस्तों के साथ शुक्रवार को पटियाला पहुंचे।

7 को किसी तरह से गुजारी होटल मेें रात

एडवोकेट मनिंदर साही ने बताया कि वह तीन दोस्तों के साथ 5 को श्रीनगर की नगीना लेक पहुंचे। एक रात वहां गुजारी। 6 सितंबर को न्यू जैकलेन हाउस बोट पर ठहरे। यहां से पहलगाम जाना था। बाढ़ के कारण रास्ता खराब होने से आगे नहीं जा सके। आगे की जानकारी लेने टूरिज्म डिपार्टमेंट के हेड ऑफिस पहुंचे। वहां से हमको हीमाल होटल भेजा गया। हीमाल होटल में सभी वीवीआईपी थे। वहां के 60 रूम ऐसे लोगों के ही पास थे। 7 की रात को पानी ज्यादा बढ़ने की खबर मिलनी शुरू हो गईं। बस फिर मन में यही चल रहा था कि कब और कैसे घर पहुंचा जाय। होटल के अंदर पानी चुका था। सब लोग डरे थे। वहां से गवर्नर हाउस पहुंचना था। पर कैसे। किसी को भी समझ नहीं रहा था। सभी परेशान थे। कुछ देर बाद कश्मीरी बोट लेकर होटल पहुंचे। वोट चलाने वाले वैसे एक व्यक्ति से 100 रुपए लेते थे। रेट बढ़ाकर 200 रुपए कर दिया। सबके फोन बंद हो चुके थे और घरवालों से संपर्क टूट चुका था।
लूटपाट करने वाले रहे सरगर्म
मनिंदर ने बताया कि बाढ़ के दौरान लोगों को जान बचाने की पड़ी थी। लोकल लोग फंसे लोगों से लूटपाट करने में लगे थे। काफी लोगों को सामान चोरी हो गया था। सुनने को मिला कि किसी भी अंजान व्यक्ति के साथ जाए क्योंकि लोगों को बचाने का झांसा देकर उन्हें मारकर सामान लूटने की बातें हो रही थीं। इसके कारण होटल में फंसे व्यक्तियों में से किसी भी व्यक्ति ने अनजान लोगों का सहारा नहीं लिया था।
केवल आर्मी ने की मदद

एडवोकेट साही ने बताया कि जब वह हैलीपेड पर पहुंचे वहां जान बचाने के लिए लोगों की लाइन लगी हुई थीं। सेना के जवानों अफसरों का बड़ा सहयोग रहा। हेलीकॉप्टर से पहले महिलाओं और बच्चों को निकालने का काम जारी था। चार दिन हैलीपैड पर बिताए। जिला प्रशासन ने लोगों को किसी भी तरह की सहायता नहीं पहुंचाई। बीएसएफ और सेना जवान लोगों की जान बचाने में लगे रहे। पहले दिन कुछ खाने को नहीं मिला। दूसरे दिन रात को सूखी ब्रेड मिली। तीसरे दिन भी ब्रेड ही मिली। एक बिस्किट का पैकेट पड़ा था तो चारों ने बांटकर खाया। इस दौरान दो लोग रेस्ट करते और दो सामान की रखवाली। चौथे दिन हेलीकॉप्टर से हमें निकाला। एयरपोर्ट पर जिन लोगों को ट्रीटमेंट चाहिए था। सेना ने उनको ट्रीटमेंट दिया। जिन लोगों के पास घर जाने को पैसे नहीं थे, उन्हें टिकट मुहैया करवाई गई।