पटियाला. हार्ट अटैक आने पर मरीज का सही ट्रीटमेंट होने के अवसर कम होते हैं, लेकिन अमर हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजिस्ट डाॅ. अमनदीप मड़कन ने एक ऐसे मरीज की एंजियोग्राफी करके उसको नया जीवन दिया है जिसकी हार्ट अटैक के कारण 100 फीसदी नसें ब्लॉक हो गई थीं। डाॅ. मड़कन ने बताया कि महिला बेसुध अवस्था में अस्पताल में एडमिट हुई थी। सबसे दिलचस्प बात यह थी कि महिला का ब्लड प्रेशर का लेबल केवल 50 था।
महिला की एंजियोग्राफी करनी शुरू की गई तो पता लगा कि पहले भी दिल में छेद होने के चलते आॅपरेशन किया गया था। हार्ट की नसें सिकुड़ने के कारण एंजियोग्राफी में दिक्कत तो आई, लेकिन काफी मेहनत के बाद ब्लॉक सारी नसें खोली गई। एंजियोग्राफी पूरी होने के बाद मरीज की हालत स्थिर हो गई और मेडिसन देने के बाद उसका ब्लड प्रेशर भी नाॅर्मल हो गया। उन्होंने बताया कि आज के दौर में 35 फीसदी मौत हार्ट अटैक से होती हैं। यदि हार्ट अटैक होने के बाद समय पर मरीज को अस्पताल पहुंचाया जाए तो मरीज को बचाया जा सकता है।
डाॅ. मड़कन ने बताया कि पहले 50 साल के ऊपर के लोगों को हार्ट अटैक होने की संभावना होती थी, लेकिन अब 30 साल के युवाओं को भी यह परेशानी आने लगी है। एक केस के बारे में शेयर करते हुए डाॅ. मड़कन ने बताया कि उनके पास हार्ट अटैक का ऐसा केस भी आया था, जिसकी उम्र महज 27 साल थी। वजन 85 किलो होने के बावजूद भी उसे हार्ट अटैक गया। जब इसका कारण तलाशा गया तो पता लगा कि युवक फास्ट फूड का शौकीन था।
स्मोकिंग हार्ट अटैक का सबसे बड़ा कारण
उन्होंने बताया कि हार्ट अटैक का सबसे बड़ा कारण स्मोकिंग है। इससे खून गाढ़ा हो जाता है और धमनियों में जमना शुरू हो जाता है। इसके अलावा शूगर और हाईपरटेंशन भी हार्ट अटैक के कारण हैं। इस बीमारी से बचने के लिए सुबह सैर जरूरी है और फास्ट फूड और घी का कम उपयोग करें। ब्लड प्रेशर, शूगर, मानसिक तनाव, शराब की अादत मोटापा भी दिल के रोगों का मुख्य कारण है। अस्पताल के सीईओ डाॅ. अमरजोत सिंह बहिया, डीएमएस डाॅ. जेएस सरां, डाॅ. गुरप्रीत बट्टू, मार्केटिंग इंचार्ज सतनाम सिंह विशाल मेहता भी मौजूद रहे।