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सत्संग के विचारों पर मनन जरूरी: साध्वी

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज| पटियाला

दिव्यज्योतिजाग्रति संस्थान ने बलबेड़ा में तीन दिवसीय श्री शिव कथा के दूसरे दिन शनिवार को साध्वी जगदीपा भारती ने कहा कि कई जगह पर नित्य प्रभु की कथा सतसंग प्रवचन होते हैं। बड़ी संख्या में लोग वहां पहुंचकर विचारों को सुनते हैं। इसके बावजूद समाज में परिवर्तन नजर नहीं आता। कारण यह है कि आज मनुष्य इन विचारों को सुनने तक ही सीमित है। तो वह इन पर मनन करता है, ही ईश्वर दर्शन के लिए आगे कदम बढाता है। इसलिए वह इन विचारों से लाभ नहीं उठा पाता, क्योंकि ईश्वर दर्शन के लिए प्रेरित करना ही महापुरूषों के सतसंग प्रवचनों का मुख्य उद्देश्य होता है। साध्वी जी ने कहा कि केवल सुनकर आचरण करना खतरनाक हो सकता है। सुनने के साथ साथ मनन करना भी आवयक है। वर्षा का जल शुरू में तो शुद्ध होता है, वातावरण के धूल कणों से मिलकर मैला हो जाता है। यदि उसे पीना हो, तो हमें इंतजार करना होगा कि धूल कण नीचे तल पर बैठ जाएं। वैसे ही यदि हमें भी ग्रहण किए गए विचारों के शुद्ध भावों को समझना है तो ठहर कर, मनन करना होगा। हमें चाहिए कि हम सुनकर, समझे, विचार करें और तब कर्म क्षेत्र में उतरें।