सुबह देवी आराधना, शाम को होगा रावण दहन
25सितंबर : घटस्थापना, 26 सितंबर : द्वितीया, 27 सितंबर : तृतीया, 28 सितंबर : चतुर्थी, 29 सितंबर : पंचमी, 30 सितंबर : षष्ठी, 1 अक्टूबर : सप्तमी, 2 अक्टूबर : महाअष्टमी, 3 अक्टूबर : महानवमी और दशहरा पर्व।
मांगलिककार्य और पूजन के लिए श्रेष्ठ
अक्षयतृतीया और विजय दशमी पर्व अबूझ मुहूर्त के रूप में मान्य हैं। ये मांगलिक कार्य, खरीददारी और पूजन के लिए श्रेष्ठ माने गए हैं। इस दिन वाहनों की बिक्री, स्वर्ण आभूषण की खरीद, व्यापार मुहूर्त आदि कार्य आरंभ श्रेष्ठ रहेगा।
पं. गिरीश सेमवाल।
भास्कर न्यूज| पटियाला
देवीआराधनाके पर्व नवरात्र में नवमी तिथि को सुबह देवी की आराधना होगी, तो शाम को विजयादशमी पर्व में रावण दहन होगा। नवरात्र पर्व में इस बार नवमी और दशमी तिथि एक ही दिन हैं। शास्त्रानुसार दशमी तिथी अपराह्नव्यापिनी होने से नवमी में रही दशमी को विजयादशमी मनाई जाएगी।
ज्योतिषविदों के मुताबिक 25 सितंबर को घटस्थापना के साथ नवरात्र शुरू होंगे। नवरात्र 3 अक्टूबर तक चलेंगे। पंडित गिरीश सेमवाल के अनुसार 2 अक्टूबर को दोपहर 12:08 बजे तक अष्टमी है। इसके बाद नवमी शुरू हो जाएगी, जो 3 अक्टूबर को सुबह 9:59 बजे तक रहेगी। इसके बाद दशमी तिथि शुरू हो जाएगी
पंडित गिरीश सेमवाल ने बताया कि शास्त्रों में विजयादशमी पर्व अपराह्नव्यापिनी तिथि दशमी तिथि और श्रवण नक्षत्र होने के कारण नवमी तिथि में शाम को मनाए जाने का उल्लेख है। नक्षत्र की प्रधानता होती है। अगर श्रवण नक्षत्र भी विद्यमान हो तो और अधिक श्रेष्ठता जाती है। दशमी तीन मुहूर्त व्यापिनी नहीं होने से ही नवमी में ही 3 अक्टूबर को मनाया जाएगा।