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आरटीआई एक्टीविस्ट के सवालों पर घिरे कमिश्नर

7 वर्ष पहले
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सूचनाअधिकारमंच ने नगर निगम के ऑडिटोरियम में कराए आरटीआई अवेयरनेस सेमिनार में पहुंचे दो स्टेट इनफार्मेशन कमिश्नर बीएस ठाकुर आरएस नेगी को आरटीआई एक्टीविस्ट्स ने सबक पढ़ाया। मंच के पैटर्न पूर्व आईएएस एसके आहलुवालिया ने जहां कमीशन में अपीलों की सुनवाई का फैसला होने में 6-6 महीने का समय लगने पर कमिश्नरों से जवाब मांगा। महासचिव डीसी गुप्ता ने फ़र्स्ट अपीलेंट अथार्टी के आरटीआई डालने वाले को सम्मन भेजकर व्‍यक्तिगत तौर पर पेश होने के आदेश जारी करने पर सवाल उठाया। आहलुवालिया ने तो यहां तक कह डाला कि कई कमिश्नरों को कानून की जानकारी नहीं है। उन्होंने अपने साथ एक ऐसा वाक्या भी सुनाया जिसमें कमिश्नर ने गलत आदेश दिए गए जिसको बाद में हाईकोर्ट ने रद किया गया। खुद कमिश्नरों को कानून की जानकारी देने के लिए ट्रेनिंग कैंप लगाने चाहिए। कमिश्नर आरएस नेगी ने सफाई दी कि कई बार पीआईओज (पब्लिक इनफार्मेशन अफसर) को एक्ट की सही जानकारी होने के कारण कमीशन को टाइम देना पड़ता है। सेमिनार में ह्यूमन राइट्स कमीशन के सदस्य बलजिंदर ठाकुर, पंजाब पब्लिक सर्विस कमीशन की सदस्य अनिता पांडव, सीनियर डिप्टी मेयर जगदीश चौधरी, डिप्टी मेयर हरिंदर कोहली, प्रधान एसडी भरत ओपी गर्ग मौजूद रहे।

400 से ज्यादा आरटीआई डालकर किए कई खुलासे

मंचपूर्व प्रधान पीयू के प्रो. राजिंदर कुमार ने मंच की कामों का जिक्र करते हुए बताया कि 6 फाउंडर मेंबरों के शुरू हुए मंच में अब 120 मेंबर हैं। मंच ने 400 से ज्यादा आरटीआई डालकर घोटालों का पर्दाफाश किया, वहीं 21 दिनों से पहले घरेलू सिलेंडर की बुकिंग करने जैसे कोई नियम होने, घरेलू सिलेंडरों की एक्सपायरी डेट बताने, जुड़वा बच्चियों को सिंगल चाइल्ड की सभी सरकारी सुविधाएं मुहैय्या होने, रेलवे में सफर करते समय दुर्घटना होने पर मुफ्त बीमा सुविधा होने जैसे सैकड़ों लोकहित की जानकारियां भी लोगों तक पहुंचाई।

अारटीआई पर, डीसी गुप्ता ने दी ये जानकारी

{सिर्फपंजाबी में ही आरटीआई डालो, ऐसा कोई नियम नहीं है।

{आरटीआई के साथ 10 रु फीस है। गरीबी रेखा से नीचे होने पर यह फीस माफ है।

{अगर कोई व्यक्ति सारी जानकारी फ्लॉपी में लेना चाहता है तो उसे अलग से 50 रु जमा कराने होंगे।

{अगर कोई आरटीआई एप्लीकेशन खुद नहीं लिख सकता तो पीआईओ उक्त व्यक्ति की एप्लीकेशन लिखकर देगा।

{30 दिन में सूचना मिले, फी