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वेलेंटाइन डे स्पेशल

5 वर्ष पहले
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खाली दुकान, घर बिस्तर, कुछ यूं जीती प्यार की जंग

बिंद्रा दंपति के प्यार और शादी के बाद किए गए संघर्ष में उनकी जीत की कहानी में िसफर से शिखर तक का सफर

पटियाला। मैंआर्य समाजी परिवार से थी और वो सरदार। 1980 की बात होगी। आर्य समाज में उनकी दुकान होती थी और मैं स्कूल जाती थी। कब प्यार हुआ पता हीं नहीं चला। जब हमारे प्यार की खबर हम दोनों के परिवार वालों को हुई, तब उन्होंने ऐतराज किया। सपने टूटते दिख रहे थे। उसके बाद अपने भाई से बात की। उन्होंने हमारी मदद की। हम दोनों लोग बांबे चले गए और वहीं पर शादी की, तब साल 1981 था। आर्य समाज के पास ससुराल का पुश्तैनी टेंट का काम था।

हम लोग जब बांबे से लौटे तो ससुराल वालों ने मॉडल टॉउन में एक खाली दुकान दे दी। घर, बिस्तर। खाना बनाने का सामान भी नहीं। हमारी मां ने एक स्टोव दिया। वह पहला दिन था जब स्टोव की पिन होने के कारण चाय नहीं पी सके। सरहंदी गेट के पास कोला वाले टोबे से पैदल रेलवे स्टेशन आकर चाय पीनी पड़ी। अब हम दोनों की असली परीक्षा शुरू हुई। 300 रुपए में किराए पर कमरा लिया। तब हमारी मुलाकात थापर यूनिवर्सिटी के तबके एओ से हुई। उनके पास दो हजार रुपए की कमेटी डाली। 20 हजार रुपए उधार लिए। उससे घर का सामान लिया। धीरे-धीरे पति ने बिजनेस शुरू किया। 35 साल के इस संघर्ष में पति और हम एक दूसरे का साया बन कर रहे। बिजनेस में कोई रुकावट आए और बच्चों को बेहतर परवरिश मिले, इसलिए बख्शी वीर सिंह स्कूल में पढ़ाया। कोशिश रंग लाई। हमने पुश्तैनी टेंट के काम से बड़ा काम खड़ा किया। धीरे-धीरे पैलेस खोल लिया। यह सब एक दूसरे के बिना नहीं हो सकता था। पहले जो विरोध करते थे आज सब साथ हैं।

(जैसाअमितशुक्ला कोबताया।)

फलसफा: तब तक हार माने जब तक जीत मिल जाए

बीतेदिनों घायल वंस अगेन मूवी देखी। सनी का डायलॉग कि, \\\"तब तक हार नहीं माननी चाहिए जब तक जीत मिल जाए;। यह मेरे जीवन पर पूरी तरह से फिट बैठती है। परमजीत ने बताया कि शादी के बाद सब कुछ नए सिरे से शुरू किया। हायर सेकेंडरी की पढ़ाई के बाद मैंने बिजनेस संभाला। पढ़ाई का शौक था। कॉरस्पॉन्डेंस से पढ़ाई की। पॉलिटिकल साइंस से एमए किया। एक साल जनगणना विभाग में नौकरी की। मन नहीं माना। नौकरी छोड़ दी। परमजीत ने बताया कि शादी के बाद सब कुछ नए सिरे से शुरू किया। अगर प्रमोद का साथ नहीं मिलता, तो शायद यह संभव भी नहीं था। आज जो भी है उसकी सूझबूझ और साथ के ही बदौलत है।

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