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बीसीसीआई के लिए तो खेल रहे क्रिकेटर्स 4 साल से नहीं खेला बैंक के लिए टूर्नामेंट
एसबीओपीक्रिकेट में अपनी अचीवमेंट्स के आधार पर नौकरी पाने वाले क्रिकेट खिलाड़ियों की बैंक टीम में से ज्यादातर खिलाड़ी अपने बेनेफिट्स कमाने में लगे हैं और बैंक को इस बात का कोई फायदा नहीं है।
क्योंकि जानकारी के मुताबिक पिछले करीब 4-5 सालों से बैंक की तरफ से खिलाड़ियों ने कोई बड़ा टूर्नामेंट नहीं खेला है। कई खिलाड़ी ऐसे हैं, जोकि बीसीसीआई से जुड़े हुए हैं और वहां से भी पैसा कमा रहे हैं। ये खिलाड़ी बैंक से मिलने वाली छुट्टियों का पूरा लाभ ले रहे हैं, वहीं हर रोज प्रैक्टिस के लिए मिलने वाले 3 घंटे भी खिलाड़ी ले रहे हैं। हालांकि खिलाड़ियों का कहना है कि जब बैंक मैनेजमेंट अरेंजमेंट करेगी, तभी वो खेलने जाएंगे। कई बार तो टूर्नामेंट खेलने के लिए भेजी गई एप्लीकेशन रिजेक्ट भी हुई हैं। हालांकि बैंक अथॉरिटी का कहना है कि क्रिकेटर बैंक के लिए खेल रहे हैं।
गौरतलब है कि स्टेट बैंक ऑफ पटियाला में इस समय 16 के करीब क्रिकेट खिलाड़ी हैं। ये सभी सीनियर खिलाड़ी हैं। इन खिलाड़ियों का रिकार्ड भी अच्छा रहा है। इसमें प्रमुख नाम भारतीय टीम में खेल चुके पंकज धरमानी, गौरव शर्मा, रंजीव शर्मा, मुनीष बाली और संजय महाजन हैं। ये सभी खिलाड़ी बीसीसीआई से जुड़े हुए हैं और कोई कोच की या फिर कोई रेफरी की ड्यूटी निभा रहे हैं।
यानि एसबीओपी से तो सेलरी मिल रही है, बीसीसीआई जोकि प्राइवेट फर्म है, इसके लिए नौकरी करके साल के पैकेज भी ले रहे हैं। पर इस सब में बैंक को कोई फायदा नहीं है। क्योंकि तो ये बैंक के लोगो लगाकर कहीं जाते हैं और ही किसी तरह से बैंक की कोई मशहूरी करते हैं।
इनके अलावा बाकी सभी खिलाड़ी रणजी ट्रॉफी मैच खेल चुके हैं। यहां बता दें कि आईपीएल खिलाड़ी सरबजीत लाड्डा भी बैंक में जॉब करते हैं।
चाहे बैंक की टीम ने पिछले 4-5 सालों से कोई मैच नहीं खेला है। पर हर साल क्रिकेट किट, गेंद, बैट और बाकी जरूरी सामान बैंक से ले रहे हैं। वहीं, जब टीम टूर्नामेंट खेलने ही नहीं जा रही है तो इससे टैलेंटेड खिलाड़ी जोकि काफी नाम कमा रहे हैं, उनके लिए जॉब का कोई रास्ता नहीं खुल रहा है। हालांकि इसे लेकर बैंक के खिलाड़ियों का कहना है कि अगर कोई बीसीसीआई के साथ जुड़ा भी है तो वो बैंक से छुट्टी लेकर ही जाता है। उस दौरान वो बैंक से कोई बेनीफिट नहीं लेते हैं। वहीं, पिछले साल अगस्त में ही पब्लिक सेक्टर टूर्नामेंट रायपुर में खेला गया है। बाकी जब मैनेजमेंट भेजेगी, तभी खिलाड़ी खेलने जाएंगे। ये तो मैनेजमेंट पर डिपेंड करता है कि वो खिलाड़ियों के लिए क्या कर रहे हैं।
^इसे लेकर डीजीएम एचआर नीशीथ कुमार का कहना है कि वो क्रिकेट खेलते हैं, इसलिए बैंक में नौकरी कर रहे हैं बैंक में नौकरी करने का मतलब ये नहीं कि वो अपना करियर क्रिकेट में आगे देखें। बैंक के लिए टूर्नामेंट भी खेलते हैं। अगले महीने गोवा में पब्लिक सेक्टर टूर्नामेंट होने जा रहा है, उसमें टीम भाग लेगी। बैंक उन्हें उनकी बनती सुविधाएं देगा। इससे बैंक को कोई नुकसान नहीं है। टीम हर साल कई टूर्नामेंट खेलती है।