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बच्चे, स्टाफ, बजट ~56 लाख

5 वर्ष पहले
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सरहंदीबाजार में संस्कृत महाविद्यालय के नाम पर पिछले दो सेशन से बजट का गोलमाल हो रहा है। बजट कहां पर खर्च हो रहा है। इसका भी पता नहीं है, क्योंकि पिछले दो सेशन से स्कूल में एक बच्चा तक नहीं है। जबकि यहां केवल एक क्लर्क और सेवादार ही तैनात है। यह खुलासा आरटीआई में हुआ है।

आरटीआई अर्बन इस्टेट के निवासी ने डाली थी। उन्होंने डायरेक्ट आॅफ एजुकेशन कॉलेजेज से पूछा था कि संस्कृत महाविद्यालय के नाम पर सालाना कितना कहां पर खर्च हो रहा है। आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक सेशन 2013-14 में स्कूल का बजट 56 लाख और खर्च 31.48 लाख से जयादा था। इस सेशन में स्कूल में कोई बच्चा और टीचर तक नहीं था। आरटीआई में 2014-15 का बजट तो नहीं बताया गया पर खर्च 31.76 लाख से ज्यादा था। इन दो सेशन में यहां पर एक क्लर्क और एक दर्जा चार कर्मचारी ही काम कर रहा था। क्लर्क नवीन ने बताया कि जल्दी छुट्टी होने के कारण बच्चे चले गए हैं।

संस्कृत महाविद्यालय का बाहरी गेट।

स्टाफ के बारे में नहीं दे सकते जानकारी

फिजिकलकॉलेज की प्रिंसिपल और महाविद्यालय की इंचार्ज डॉ. सिमरत कौर ने कहा कि यहां बच्चे तो आते हैं पर उनको महिंदरा काॅलेज शिफ्ट कर दिया जाता है। ज्यादा जानकारी चाहिए ताे क्लर्क नवीन को बुलाना होगा। यहां जो स्टाफ आया था, उसे रीलिव कर दिया गया था। स्टाफ कहां रिलीव किया गया, यह जानकारी अफसरों के आदेश के बाद ही दी जा सकती है।

कई महकमों को देर से मिल रही सेलरी

^वाटरसप्लाई, बिजली बोर्ड, पीआरटीसी समेत कई महकमे सेलरी और पेंशन को लेकर धरने प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि ऐसे स्कूलों का बजट लाखों का है। लोगों की माने तो इस स्कूल में पुराने समय में थाना होता था। बाद में इसे संस्कृत महाविद्यालय बना दिया गया।

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