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\"किसान मिलकर बनाएं कंपनियां\'

7 वर्ष पहले
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फूड सिक्योरिटी से इकोनॉमिक में अस्थिरता

पटियाला। प्रदेशमें एग्रो इंडस्ट्री खड़ी करनी है तो इसके लिए बाहरी कंपनियों का यहां लाकर काम करने की जरूरत नहीं है। यहीं से किसानों को इकट्ठा कर कंपनियां बनानी होंगी। जैसा कि बाकी राज्यों ने किया है। ये कंपनियां ही यहां फसलों की डायवर्सिफिकेशन से लेकर अलग-अलग पहलुओं पर काम करेंगी। प्रदेश में रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट अहमदाबाद के सेंटर फॉर मैनेजमेंट इन एग्रीकल्चर के प्रोफेसर डॉ.. सुखपाल सिंह ने यह बात कही। पीयू में कॉन्फ्रेंस में डॉ. सुखपाल ने एग्रो इंडस्ट्री पर कहा कि दो तरीके से इस सेक्टर में काम होता है। टॉप डाउन और बॉटम अप। पंजाब सरकार टॉप डाउन तरीके को अपना रही है। विदेशों से मल्टीनेशनल कंपनियों को यहां लाकर एग्रो इंडस्ट्री खड़ा करना चाहती है। एमपी हरसिमरत कौर बादल फूड प्रोसेसिंग पर योजनाएं बनाकर काम करना चाहती हैं।

यहां की सरकार ने किसानों से खेती के लिए उनकी जमीन मांग ली थी कि सरकार खुद खेती करेगी। ये टॉप डाउन अप्रोच के साथ काम नहीं हो सकता। विदेशों और देश के अन्य राज्यों में बॉटम अप पॉलिसी पर काम हो रहा है। सरकार पंजाब के किसानों के एक ग्रुप को लेकर कंपनी बनाए और वो कंपनी प्रोडक्शन से लेकर मार्केटिंग का काम देखे। अगर ऐसा हो जाता है तो बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा और गेहूं, धान की खेती पर आधारित पंजाब में कुछ अलग तरह की खेती होगी। फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री के विकास के लिए बहुत सी अन्य बातों पर सरकार को ध्यान देगा होगा। प्रदेश में तीन फीसदी इंडस्ट्री से रोजगार मिल रहा है। काफी इंडस्ट्री जाति आधारित है। एग्रो इंडस्ट्री खड़ी करनी होगी। छोटी यूनिट्स को अपग्रेड करना होगा। प्रदेश में टेक्सटाइल, फूड एंड ब्रेवरेजेज और कॉटन इंडस्ट्री ज्यादा है। कॉटन का एरिया काफी गिर रहा है। हॉर्टिकल्चर, मसालों, पोल्ट्री, मीट, सोयाबीन, आम, केला, आलू ऐसे सेक्टर हैं, जिन पर बहुत काम हो सकता है।

वेयर हाउस एक्ट के बारे में किसानों को पता नहीं

वेयरहाउस रिसीव्स एक्ट के बारे में अवेयरनेस की जरूरत है। इसके बारे में किसानों को पता नहीं है। एक्ट में किसान वेयर हाउस में अपनी फसल रखकर लोन भी ले सकता है। पर पंजाब में बहुत ही कम ऐसे किसान हैं, जो इस एक्ट का फायदा ले रहे हैं। कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग की प्रमोशन और रेगुलाइजेश