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तन को नहीं, मन को सजाने की जरूरत: साध्वी
पटियाला। दिव्यज्योति जाग्रति संस्थान ने कस्बा बलबेड़ा में तीन दिवसीय श्री शिव कथा का आयोजन किया है। तीसरे दिन साध्वी जगदीपा भारती ने बताया कि पार्वती जी ने नारद मुनि के कहे अनुसार भगवान शिव की भक्ति की थी। भगवान शिव जो कि सती के हवन यज्ञ में आत्महत्या करने के बाद अभी तक समाधि में बैठे थे। उधर, ऋषि मुनि सब माता पार्वती के विवाह का प्रस्ताव लेकर जाते हैं। भगवान शिव उनके इस प्रस्ताव को मंजूर कर लेते हैं। साध्वी ने बताया कि प्रभु ने विवाह वाले दिन जो श्रृंगार किया था वह बहुत ही अनोखा था। उन्होंने कहा कि इस तन को नहीं अपितु अपने मन को सजाओ। ताकि वह हरि तुम्हारे मन में आकर अपना आसन ग्रहण करें।
साध्वी जगदीपा भारती