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किसानों ने माना कीटनाशकों के यूज से बढ़ रहा कैंसर

7 वर्ष पहले
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प्रदेशमेंबढ़ रहे कैंसर की वजह 33 फीसदी किसान खेती में यूज होने वाली जहरीली कीटनाशक दवाओं और खादों को मानते हैं। जबकि 30 फीसदी तंबाकू, 15 फीसदी पॉल्यूशन, 13 फीसदी पानी में बढ़ रहे यूरेनियम और 9 फीसदी लगातार बिगड़ते जा रहे रहन सहन को मनते हैं। ये रिसर्च पीयू के जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन डिपार्टमेंट के एमफिल स्टूडेंट हरगुणप्रीत सिंह ने असिस्टेंट प्रोफेसर डाॅ. हैप्पी जेजी के देखरेख में की। पंजाब के मालवा क्षेत्र में कैंसर उपजाने वाले रसायनों संबंधी किसानों में जागरुकता विषय पर लिखे रिसर्च निबंध के लिए बठिंडा और पटियाला के कुल 100 किसानों पर सर्वे किया।

अन्य आंकड़ों में 64 फीसदी किसान कीटनाशक दवाइयां लेने से पहले इनकी शीशियों पर लगे निशान, फोटो और रंगदार कोडिंग जरूर देखते हैं। 71 फीसदी का कहना है कि वो फसलों पर कीटनाशकों का छिड़काव करने के समय जरूरी आदेशों और हिदायतों का पालन करते हैं। 35 फीसदी किसानों ने बाकी मीडिया के साधनों के मुकाबले अखबारों के जरिये निभाई जा रही भूमिका को उत्तम माना।

34 फीसदी जागरुकता के लिए खेतीबाड़ी संबंधी रसालों से, पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी द्वारा छापा मासिक जनरल \\\'चंगी खेती\\\' पढ़ना पसंद करते हैं। 30 फीसदी टेलीविजन पर खेतीबाड़ी संबंधी प्रोग्रामों में दूरदर्शन के प्रोग्राम मेरा पिंड मेरे खेत देखते हैं। हरगुणप्रीत ने बताया कि हैरानी की बात ये रही कि जब किसानों को उनकी फसलों में प्रयोग की जाने वाली कोई भी 10 कीटनाशक रसायनों के नाम के बारे में पूछा तो सिर्फ 38 फीसदी किसान ही नाम बता पाए।

डिपार्टमेंट हेड डाॅ. हरजिंदर सिंह वालिया ने कहा कि आज के समय में जब प्रदेश में कैंसर अपने पैर पसार चुका है, हरगुणप्रीत का ये काम बहुत कीमती है। डाॅ. हैप्पी जेजी ने बताया कि ये रिसर्च मालवा क्षेत्र के दो जिलों के गांव में इसलिए की क्योंकि सरकार के अक्टूबर 2012 में कराए गए सर्वे मुताबिक पिछले 5 सालों में कैंसर से मरने वाले 33, 318 व्यक्तियों में से 14, 682 केवल मालवा के हैं।

हरगुणप्रीत सिंह।