‘20 साल से कहां सोई रही सीसीआईएम’
पटियाला। सेंट्रलकाउंसिल ऑफ इंडिया (सीसीआईएम) द्वारा अयोग्य घोषित किए गए आयुर्वेदिक कॉलेज के 9 टीचरों ने काउंसिल की कार्रवाई पर ही सवालिया निशान लगाने शुरू कर दिए हैं। मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च डिपार्टमेंट के मंत्री, सेक्रेटरी डायरेक्टर को भेजे पत्र में टीचरों ने कहा कि वे पिछले 20 सालों से कॉलेज में पढ़ा रहे हैं। तब सीसीआईएम को उन्हें अयोग्य घोषित करने की याद नहीं आई। अब कॉलेज में तीन साल बाद बीएएमएस शुरू होने के बाद जब इंस्पेक्शन हुई तो उन्हें अचानक याद आई कि टीचर पढ़ाने के योग्य ही नहीं हैं।
आयुर्वेदिक अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. राकेश सिंगला ने कहा कि 1963 सर्विस रूल्स के मुताबिक ही उन्हें प्रमोशन मिली है। यह मामला पहले ही हाईकोर्ट में भी चल रहा है। अदालत का फैसला अभी आना बाकी है। 2012 में भी सीसीआईएम इंस्पेक्शन पर आई थी। इंस्पेक्शन में उन्होंने भी 9 टीचरों को अयोग्य करार दिया था, लेकिन जब उन्होंने अदालत की कॉपी दिखाई तो टीम पूरी तरह से संतुष्ट हो गई।
उन्होंने बताया कि जहां तक कोड मिलने का मामला है तो सीसीआईएम की ओर से पहले उन्हें कोड जारी किया गया बाद में विदड्रॉ किया गया। इसलिए उन्होंने इस मामले में काउंसिल को कोर्ट नोटिस की कॉपी भेज दी है।
मई तक रखें टीचर: जगजीत
सीसीआईएमके मेंबर डॉ. जगजीत सिंह ने बताया कि कॉलेज के लिए यही ठीक रहेगा कि वह मई तक टीचरों का इंतजाम कर ले। जो 9 टीचर अयोग्य घोषित किए गए हैं, उन्हें सीसीआईएम की तरफ से कोर्ड जारी नहीं किए गए। ऐसे में यदि मई तक टीचरों की व्यवस्था नहीं होती तो एक बार फिर कॉलेज पर संकट सकता है।