(भास्कर के हाथ लगे वो फर्जी नीले कार्ड जिनको बनाने में लापरवाही बरती गई।)
पटियाला। इलाके के कौंसलर ने तसदीक किया, अफसर ने पड़ताल की। एसडीएम ने प्रवानगी दी, फिर भी 38 से ज्यादा फर्जी नीले कार्ड बन गए। ये फर्जी नीले और इनके क्लेम फार्म, स्व घोषणा पत्र भास्कर के हाथ लगे हैं। इनमें कई ऐसे कार्ड हैं जो गरीबी रेखा से नीचे के नहीं हैं। कार्ड बनाने की कोई भी शर्त पूरी नहीं करते है। काॅर्डों के फर्जी होने की तसदीक खुद कौंसलर भी यह कहकर कर रहे हैं कि जिन लोगों को उन्होंने तसदीक किया था कि वाकई ये गरीबी रेखा से नीचे हैं, उनके कार्ड तो आज तक बनकर नहीं आए हैं। महकमे ने अपनी मर्जी से चहेते लोगों को कार्ड बनाकर डिपो पर भेजे हैं।
इनवेस्टिगेशन में खुलती रही घोटाले की परत : भास्कर के हाथ नए बने करीब 18 नीले कार्ड लगे। इनमें दो कार्ड ऐसे थे जो राम नगर गली नंबर 3 में एक घर में रहने वाले दो सगे भाईयों के थे। पड़ताल की तो एक कार्ड ऐसा मिला जिसके अकेले नाम पर कार्ड जारी कर दिया गया था। हमने कार्डों के लिए अप्लाई करने वाले क्लेम फार्म, स्व घोषणा पत्रों को निकलवाया। सामने आया कि इनमें पड़ताली अफसर के साइन है, कौंसलर ने तसदीक किया है और एसडीएम के साइन मोहर लगी है। सवाल यह है कि बिना वेरीफिकेशन कैसे इन फार्मों को कार्ड बनाए जाने के योग्य घोषित कर दिया गया? कैसे कार्ड बनकर डिपो तक पहुंच गए?
इलाके के कौंसलर और अफसर बोेले
^कोई व्यक्ति कार्ड का हकदार है या नहीं, ये देखना हमारा काम नहीं है। हमारे पास तो कार्ड बनकर गए हैं, हमें उन कार्डों पर राशन देना है। अब कार्ड बनाने से पहले वेरीफिकेशन हुई या नहीं, इसकी जानकारी या जवाबदेही हमारी नहीं है। अजयवीरसिंह सराओ, डीएफएसईपटियाला
^ये कैसे हो सकता है कि कार्ड बनाने से पहले पड़ताल हुई हो और एसडीएम ने तसदीक किया हो। आप मुझे इन फर्जी कार्डों की एक काॅपी चंडीगढ़ भेजो। जांच करवाएंगे। जिस स्तर पर भी ये लापरवाही हुई है उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। प्रकाशचंद गर्ग, सीपीएस,फूड एंड सिविल सप्लाईज डिपार्टमेंट।
ये नीले कार्ड के फायदे: पंजाबसरकार ने गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों को नीले कार्ड बनाए जाते है। इन कार्डों पर आटा दाल सस्ता मुहैया होता है। केंद्र पंजाब की कई समाजिक आर्थिक स्कीमों का लाभ कार्ड के आधार पर लिया जा सकता है।
ये है कार्ड बनाने की शर्ते : कार्ड धारक की सभी सोर्सेस से सालाना आमदनी 60 हजार से ज्यादा हो। परिवारिक मेंबर के पास ढ़ाई एकड़ से ज्यादा खेती योग्य जमीन या 5 एकड़ से ज्यादा बंजर जमीन हो। चार पहिया वाहन (कार आदि) या एसी हो। कोई भी मैंबर आमदन टैक्स, पंजाब वैट टैक्स, सर्विस टैक्स या प्रोफेशनल टैक्स अदा करता हो।
परिवारिक मेंबर का किसी भी नगर निगम या नगर कौंसिल के इलाके में 100 वर्ग गज या इससे ज्यादा का प्लाट पर बनाया अपना मकान 750 वर्ग फीट या इससे ज्यादा का फ्लैट हो। मेंबर मान्यता योग्य उद्योग का मालिक हो और ही किसी सरकारी या अर्ध सरकारी विभाग में नौकरी करता हो।
''मेरे वाॅर्ड में ऐसे कई कार्ड बने है जो असल में गरीबी रेखा से नीचे नहीं है। मुझे नहीं पता कि उनके कार्ड कैसे बन गए? मैंने उनका अप्लाई करने वाला फार्म तसदीक नहीं किया है। जिनके कार्ड के लिए तसदीक किया था, उनके अब तक नहीं बने हैं। हरिंदरकोहली, डिप्टीमेयर ।
'' मेरेवाॅर्ड 8 में रविवार सुबह ही 300 से ज्यादा नीले कार्ड बांटे है। मुझे इसकी जानकारी नहीं। कौंसलर से पूछा जाता कि वाकई कार्ड बनाए जाने वाला व्यक्ति गरीबी रेखा से नीचे है या नहीं। जो कार्ड के हकदार है वो हमसे रोज कार्ड के बारे में पूछते हैं, कार्ड कब बनेगा।'' मालविंदर सिंह माली, कौंसलर
'' धानका मोहल्ले में लगभग सभी घर गरीबी रेखा से नीचे है। मर्जी से कार्ड बनाकर डिपो पर भेजे। पूछो कि जिनके कार्ड बनाए है क्या कौंसलर से पूछा है कि वाकई वो आदमी गरीब है या नहीं? चहेतों सिफारशियों के कार्ड बनाकर फर्जीवाड़े तो होना ही था। जसपाल प्रधान, पूर्वमेयर