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राजनीति का शिकार हुआ वातावरण पार्क

6 वर्ष पहले
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समाना। 9साल पहले 5 अगस्त 2006 में कांग्रेस पार्टी सरकार ने शहर के मेन गेट पर एक खूबसूरत वातारण पार्क का निर्माण किया था। ताकि शहर वासी सुबह-शाम इस पार्क में सैर कर सकें और मानसिक सुकून प्राप्त कर सकें। लेकिन आज यह पार्क एक उजड़ा हुआ बाग बन चुका है। इसका उद्घाटन तत्कालीन सांसद परनीत कौर ने एक पौधा लगाकर किया था। इस पार्क पर करीब 42 लाख रुपए खर्च किए गए थे।

कांग्रेस पार्टी के जाते ही इस पार्क का पतन भी शुरू हो गया था। पार्क में सफाई करने वाले सरकारी मुलाजिम भी गायब हो गए जिस कारण यहां घास फूस पैदा हो गया। सैर करने वालों के आराम के लिए बनाई गई झोपडिय़ों में से नशेड़ी लोहे के बेंच चुरा ले गए। पार्क से मध्य में से गुजरने वाले रजवाहे के ऊपर रखे लकड़ी के दो पुल भी गायब हैं। ओर तो ओर नगर कौंसिल द्वारा पार्क में लगाई गईं ट्यूब लाइट्स भी गायब हो चुकी हैं। प्रशासन की बे-रुखी इतनी बढ़ गई कि तो नगर कौंसिल इस पार्क की देखरेख का जिम्मा उठाने को तैयार है और ही वन विभाग। जबकि यह पार्क वन विभाग के मुलाजिमों द्वारा ही बनाया गया था।

वन विभाग ने इस पार्क में कई जगह पर पार्क की सफाई रखने और पेड़ों की महत्ता के बारे में साइन बोर्ड लगा रखे हैं। लेकिन यह केवल दूसरों को सीख देने के लिए ही साबित हो रहे हैं। पेड़ों को पानी देने के लिए एक मोटर तो लगाई है, लेकिन कभी भी मोटर वाले कमरे को खोला नहीं गया। शहर वासियों ने प्रशासन को कई बार पार्क की समस्याओं के बारे में बताया लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। पार्क की इस दुर्दशा पर तरस खाकर कई बार डेरा सिरसा के हजारों प्रेमियों ने आकर खुद सफाई की और पौधारोपण भी किया। आज आलम यह है कि पार्क में कोई भी शहर वासी सैर करने नहीं आता।

कॉटेज से गायब लोहे के बेंच। मोटर का बंद पड़ा कमरा। परनीत कौर द्वारा किया गया उद्घाटन। पार्क में उगी घास।

एनजीओ बनाकर देखरेख करने का दिया सुझाव

^रमेशगोयल, पवन कुमार, ओंकार सिंह, कश्मीर सिंह भगवान दास जैसे वातारण प्रेमियों ने सुझाव दिया कि जिस तरह पटियाला में वातारण पार्क की देखरेख के लिए रिटायर्ड़ सरकारी अफसर वातारण प्रेमियों पर आधारित एक एनजीओ काम कर रही है, उसी तरह इस पार्क के लिए भी स्थानीय वातारण प्रेमी आगे आकर एक एनजीओ का गठन करें। प्रशासन के आसरे छोड़ने की बजाय उसकी मदद ली जाए।

{न तो नगर कौंिसल ही पार्क की देखरेख करने को तैयार और ही फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के मुलाजिम