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दवाओं की जांच करेगी ड्रग अथाॅरिटी

7 वर्ष पहले
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पंजाबसरकारने मेडिकल नशे पर पाबंदी लगाने के लिए एक तरफ पुलिस को दवाओं की जांच का अधिकार दे दिया है। सिविल सर्जन से अधिकार वापस लेकर ड्रग इंस्पेक्टरों को पूरे अधिकार दे दिए हैं। ड्रग इंस्पेक्टर अब पूरी तरह से सिविल सर्जन के अधिकार क्षेत्र से बाहर अपनी मर्जी से दवाओं की जांच, सैंपलिंग छापेमारी करेंगे। नए बने ड्रग एक्ट के तहत सिविल सर्जन क्षेत्र के ड्रग इंस्पेक्टर को नशीली दवाइयों की जांच के लिए शिकायत कर सकता है। ड्रग महकमा अलग बनने के बाद जिले में दवाइयों की जांच का काम सुस्त होने लगा है। जिले में चार ड्रग इंस्पेक्टर हैं। दो पटियाला, एक-एक राजपुरा समाना, पातड़ां नाभा में जांच का जिम्मा है। केमिस्टों की खुफिया सूचना मिलने के कारण ड्रग इंस्पेक्टरों के काम में तेजी नहीं रही है।

सेलरीसीएस से तो जवाब तलबी करेगा ड्रग डिपार्टमेंट: ड्रगइंस्पेक्टर का वेतन का काम सिविल सर्जन कार्यालय के पास है, जबकि ड्रग इंस्पेक्टर रिपोर्ट ड्रग अथारिटी चंडीगढ़ को करते हैं। ड्रग इंस्पेक्टर को कोई कार्रवाई करनी हो तो इसके लिए उन्हें ड्रग अथारिटी को रिपोर्ट करनी पड़ती है। ड्रग इंस्पेक्टर कब आफिस आते हैं, कब जाते हैं अटेंडेंट का काम भी अलग हो गया है।

ड्रग इंस्पेक्टर ड्रग अथाॅरिटी के अंडर: सीएस

सिविलसर्जन डाॅ. एचएस बाली ने बताया कि नए बनाए गए ड्रग एक्ट में ड्रग अथारिटी डिपार्टमेंट अलग ही बनाया गया है। ड्रग इंस्पेक्टर भी इसी डिपार्टमेंट शामिल किए गए हैं। कहीं पर नशीली दवाइयां बिकने की यदि कोई शिकायत मिलती है तो इसकी शिकायत ड्रग इंस्पेक्टर को दे सकते हैं।

अलग अथाॅरिटी से फर्क नहीं: डाॅ. भुल्लर

इंडियनमेडिकल एसोसिएशन के मीडिया एंड मेडिकोलीगल एडवाइजर डाॅ. डीएस भुल्लर ने बताया कि नशीली दवाइयों पर रोक लगाने के लिए अलग अथारिटी बनाकर काम करने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। जो काम जिले में बैठकर आफिसर कर सकता है वह चंडीगढ़ में बैठकर नहीं हो सकता।

केमिस्ट एसोसिएशन पंजाब के प्रधान सुरजीत मेहता ने बताया कि विभाग कभी नशीली दवाइयों की जांच के लिए पुलिस विभाग की जिम्मेदारी लगा देती है, तो कभी सिविल सर्जन से अधिकार लेकर ड्रग इंस्पेक्टर को दिए जाते हैं। सरकार को चाहिए कि नशीली दवाइयों की एंट्री ही बैन कर दी जाए, इन्हें सिर्फ सरकारी अस्पतालों में बेचा जाएगा।

नशीली दवाइयों की एंट्री हो बैन: मेहता