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फंड डायवर्ट, रेलवे स्टेशन प्लेटफार्म एक्सटेंशन का मामला अटका

7 वर्ष पहले
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रेलवेस्टेशनमें प्लेटफॉर्म को बढ़ाने का मामला एक बार फिर लटक गया है। पटियाला के प्लेटफॉर्म को बढ़ाने के लिए जो फंड मिलना था, वह कहीं दूसरे स्टेशन के लिए डायवर्ट हो गया है। प्लेटफॉर्म की लंबाई कम होने के कारण खास तौर पर रात को आने वाली ट्रेनों के यात्रियों को बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

कालका-हरिद्वार वाली ट्रेन रात ढाई बजे स्टेशन पर आती है। कई संख्या में यात्री पटियाला उतरने वाले होते हैं। ट्रेन के अधिकतर डिब्बे अंधेरे में खड़े होते हैं, जिसके कारण यहां पर झपटमारी की आशंका बनी रहती है। इस समस्या को देखते हुए रेलवे डिवीजन अंबाला ने प्रपोजल मांगा था। जहां डिविजनल इंजीनियरिंग ऑफिस ने प्लेटफार्म की लंबाई 150 मीटर और बढ़ाने का प्रपोजल बनाया था। प्रपोजल सेंक्शन होने के बावजूद रेलवे ने फंड जारी नहीं किया। पटियाला कंज्यूमर एंड टेलीफोन सब्स्क्राइबर फोरम के सीएमए एचएस अरोड़ा, एचडी अग्रवाल इंजीनियर ओपी गर्ग भी डिवीजनल रेलवे मैनेजर अनिल कठपाल डिवीजनल कामर्शियल मैनेजर वीडी मीना से मिलकर प्लेटफार्म की लंबाई बढ़ाने का मुद्दा उठा चुके हैं।

प्लेटफॉर्म जिसकी लंबाई 150 मीटर तक बढ़ाने का है प्रपोजल

रेलवे की माल गोदाम वाली सड़क जोकि लंबे समय से टूटी पड़ी है।

करोड़ों की कमाई कराने वाली सड़क भी नहीं हो पाई पक्की

रेलवेस्टेशन से फैक्ट्री एरिया की तरफ जाती सड़क जिससे रेलवे हर साल करोड़ों रुपए की कमाई करता है, इस सड़क की हालत को सुधारने के लिए रेलवे के पास फंड ही नहीं है। रेलवे की मालगाड़ियों से सामान ट्रकों के माध्यम से इसी रोड से गोदामों तक ले जाया जाता है। लंबे समय से उखड़ी सड़क के कारण स्टेशन पर खड़े लोगों स्टाफ को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। जिस समय मालगाड़ी आती है, उस समय सामान ढोने वाले ट्रकों की लंबी लाइन सड़क पर लगी रहती है। सड़क की धूल-मिट्टी उड़कर स्टेशन पर आती है।

प्रपोजलभेजा लेकिन फंड नहीं मिला

^प्लेटफार्मकी लंबाई बढ़ाने के लिए बोर्ड को प्रपोजल भेजा था, लेकिन फंड आने के चलते इस पर अभी काम शुरू नहीं हो पाया है। दोबारा इसका प्रपोजल बनाकर भेजा गया है, अभी तक उसका कोई जवाब नहीं आया है। कीर्तिवर्द्धन, असिस्टेंटडिवीजनल इंजीनियर