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इंटरनेट पर मौजूद डाटा को कैलकुलेट करें

7 वर्ष पहले
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डाटाकेलिए आजकल सामने चुके नए सोर्सेज इंटरनेट आदि पर मौजूद डाट को कोई भी कैलकुलेट नहीं करता। इन पर मौजूद डाटा को भी काम में लाना चाहिए। ये डाटा विश्वसनीय है या नहीं, इस पर तो बाद में बात होगी। पहले डाटा को कैलकुलेट करने का काम शुरू होना जरूरी है। पर इसके लिए भी कई चुनौतियां सामने खड़ी हैं।

ये विचार केंद्र सरकार के चीफ स्टेटिस्टिशियन डाॅ. टीसीए अनंत ने पंजाबी यूनिवर्सिटी के इकोनॉमिक्स डिपार्टमेंट की कराई इंडियन इकोनोमेट्रिक सोसायटी की 51वीं सालाना कॉन्फ्रेंस के समापन समारोह में कहे। जहां तक डाटा की बात है, स्थाई विकास के लिए दो चैलेंज सामने आते हैं। पहला चैलेंज इनविजिबिल्टी है। इस सेक्टर में होने वाली बड़ी गिनती में एक्टिविटीज कैप्चर नहीं हो सकती। वहीं दूसरा चैलेंज मौजूदा डाटा के प्रयोग में कमी होना है। सोशल डेवलपमेंट के लिए डाटा रेवोल्युशन को काम में लाने की बात करें तो वर्ल्ड कम्युनिटी आज मिलेनियम डेवलपमेंट गोल्स (एमडीजी) की बजाए ज्यादा महत्वाकांक्षी टागरेट्स पर ध्यान दे रही है। आज ये स्थायी विकास पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं। समापन समारोह के मुख्य मेहमान प्रो. वीएन पंडित ने विचार दिए।

सोसायटी के सेक्रेट्री डाॅ. एनआर भानुमूर्ति और खजांची डाॅ. षणमुगन ने कॉन्फ्रेंस में पेश पेपरों के बारे में बताया। यहां प्रो. लखविंदर सिंह, प्रो. इंद्रजीत सिंह, डाॅ. केसर सिंह भंगू, डाॅ. जसविंदर सिंह बराड़ मौजूद रहे।

डाटाके ट्रेडिशनल सोर्सेज के बारे में बात: डाॅ.अनंत ने डाटा के ट्रेडिशनल सोर्सेज के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि वर्तमान में लोग गूगल का प्रयोग करके डाटा जेनरेट किया जा रहा है। डाटा रेवोल्यूशन कहा जा सकता है पर मुश्किल ये है कि जो डाटा मिल रहा है, उसके अलावा रिसर्च और बिल्डिंग बिहेवरियल लिकेंजेज को डेवलप किया जाना जरूरी है।

उन्होंने अकादमिक वर्ग से जुड़े लोगों से अपील की कि वो इस डाटा रेवोल्युशन को काम में लाएं और इसका प्रयोग सामाजिक विकास के लिए करें।

पीयू इकोनॉमिक्स डिपार्टमेंट की कॉंफ्रेंस के समापन समारोह के दौरान बैठे चीफ स्टेटिस्टिशियन डा. टीसीए अनंत अन्य