इस नवरात्र में नवमीं और दसवीं एक ही दिन
25सेआश्विन के नवरात्रे शुरू हो रहे हैं। नवरात्र में दो शब्द हैं। नव और रात्र। नव शब्द संख्या वाचक है और रात्र का अर्थ है रात्रि- समूह, कालविशेष। नवरात्र में संख्या और काल का अदभुत मिश्रण है। इस उत्सव में हम पहले दिन घट स्थापित कर मां दुर्गा की प्रतिमा को प्रतिष्ठित करते हैं। उनके सान्ध्यि में नवरात्र तक अखंड ज्ञान दीप का प्रतीक भौतिक दीप स्थापित करते हैं। इस बार नवरात्र में नवमीं और 10वीं एक ही दिन पड़ेगी।
माता दुर्गा के शक्ति के पूजन के लिए नवरात्र ही क्यों निश्चित किए गए हैं और वह भी नौ नवरात्र। माता दुर्गा के पूजन के लिए नौ से कम या अधिक दिन नहीं रख सकते। वैसे जब मन में आए तब भगवान या भगवती की पूजा की जा सकती है। फिर भी विशेष रूप से शास्त्रकारों ने नवरात्र का ही विधान किया है। माता दुर्गा को नौ नाम से जाना जाता है। जिनमें शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्माण्डा, स्कन्दमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी सिद्धिदात्री शामिल है।
एकतर्क यह भी : यहभी कहा जा सकता है कि नवरात्र दो होते हैं बासंतिक और शारदीय। ऋतुएं छह है: बसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमन्त और शिशिर। भगवती के तीन रूप है- महाकाली, महालक्ष्मी महासरस्वती। तो छहों ऋतुओं में भगवती के सभी रूपों की उपासना होनी चाहिए। छह को तीन से गुणित करने पर 18 दिन उपासना के बन जाते हैं। नौ बासन्तिक उपासना के लिए और नौ ही शारदीय उपासना के उद्देश्य से बांटने के लिए दोनों नवरात्रों के 9-9 दिन रखे गए हैं। देवी की उपासना में नव संख्या का विशेष महत्त्व है। जप मंत्र नौ अक्षरों का है। 25 सितंबर से शुरू होने वाले नवरात्र के 9 दिन हम परा शक्ति की पूजा, उपासना, पाठ, हवन का प्रय| करें।
काली मंिदरमें दर्शन के लिए जिले के अलावा दूसरे प्रदेशों के श्रद्धालु भी आते हैं।
प्रशासन भी जुटा तैयारी में
नवरात्रमें श्रृद्धालुओं को परेशानी हो, इसके लिए प्रशासन तैयारियों में जुट गया है। जिला प्रशासन ने पीडब्ल्यूडी, निगम, सेहत विभाग के अलावा विभिन्न महकमे के अफसरों साथ बैठक की। मंदिर श्री काली माता मैनेजमेंट कमेटी के मैनेजर नरिंदर बातिश लंग ने बताया कि नवरात्रों के दौरान मंदिर में श्रृद्धालुओं को कोई परेशानी हो इसके लिए प्रशासन पुख्ता प्रबंध कर रहा है। मंदिर में पीने वाली पानी का इंतजाम मेडिकल की सुविधा के लिए डाॅक्टरों की ड्यूटी प्